3L balance in relationship: रिश्ते कांच के नाजुक बर्तन की तरह होते हैं। थोड़ी सी भी लापरवाही इसे चकनाचूर कर सकती है। रिश्तों की डोर को संभाले रखना किसी एक की जिम्मेदारी नहीं होती। यह ऐसी कड़ी होती है जिसे दोनों तरफ से मजबूत होना पड़ता है। आजकल की दौड़-भाग वाली जिंदगी में हम रिश्तों को उतना वक्त नहीं दे पाते जितनी उसे जरूरत होती है। नतीजा ये होता है कि रिश्तों में धीरे-धीरे दरार आने लगती है और अंत में एक दिन ऐसा आता है जब रिश्ता टूट कर बिखर जाता है। ऐसी किसी भी कंडीशन से बचने के लिए रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स थ्री एल बैलेंस के फार्मूले पर जोर देते हैं। वो मानते हैं कि अगर ईमानदारी से रिलेशनशिप में इस 3 एल रूल को बैलेंस रखा जाए तो उसके टूटने की नौबत कम हो जाती है। आइए समझते हैं कि रिलेशनशिप का ये 3 L बैलेंस है क्या।

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क्या होता है रिलेशनशिप में 3 L बैलेंस (What is 3L balance)
रिलेशनशिप की दुनिया में माना गया है कि किसी भी रिश्ते की मजबूती के लिए 3 L का बैलेंस होना जरूरी होता है। इस 3 L का पहला एल है लॉयल, दूसरा एल मतलब लव और तीसरा एल मतलब लिबर्टी होता है। किसी भी रिश्ते की नींव उतनी ही मजबूत होगी जितना अच्छा बैलेंस इन तीनों के बीच होगा।
लॉयल्टी (Loyalty)
लॉयल्टी किसी भी रिश्ते की आत्मा होती है। इका मतलब सिर्फ धोखा न देना नहीं है। यह उस अटूट भरोसे की डोर है जो दो दिलों को बांधकर रखती है। अपने पार्टनर के साथ लॉयल होने का सच्चा मतलब ये है कि आप उसके साथ मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक रूप से ईमानदार रहें।
लॉयल्टी समर्पण मांगती है। क्योंकि जब एक इंसान अपने रिश्ते के प्रति पूरी तरह से समर्पित होता है, तो वह खुद को हर बाहरी आकर्षण, लालच ये भ्रम से आसानी से दूर रख पाता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लॉयल्टी का मतलब नजरों के साथ अपनी नीयत को भी साफ रखना है। रिश्ते में लॉयल्टी पार्टनर को न सिर्फ सुरक्षित माहौल देता है बल्कि प्यार में ठहराव भी लाता है।

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लव (Love)
रिलेशनशिप में दूसरी सबसे अहम चीज है प्यार। प्यार ही वह भावना होती है जो दो लोगों को आपस में जोड़ती है। प्यार का मतलब सिर्फ पाना नहीं होता, सच्चा प्यार वह होता है जब हम अपने प्यार की अच्छाइयों के साथ-साथ उसकी कमियों को भी अपनाते हैं। प्यार में धैर्य होता है, समझदारी होती है और सबसे जरूरी अपनापन होता है।
किसी भी रिलेशनशिप में प्यार उस एहसास का काम करते हैं जो मुश्किल समय में भी साथी का साथ नहीं छोड़ता। अगर प्यार सच्चा और मजबूत है तो हर झगड़ा, हर गलतफहमी और हर दूरी को मिटाया जा सकता है। प्यार इंसान को परिपक्व बनाता है। यह उसे बिना बोले समझने की ताकत देता है। प्यार में वो जादू है कि वह हर रोज के छोटे-छोटे पलों में भी खुशी खोज लेता है। प्यार से मुरझा चुके रिश्ते के पौधे को फिर से हरा किया जा सकता है।
लिबर्टी (Liberty)
रिलेशनशिप में जितना जरूरी लव और लॉयल्टी है, लिबर्टी कहीं भी उससे कम नहीं है। लिबर्टी रिश्तों में पनपने वाले घुटन को खत्म करता है। रिश्ते में हमें इस बात का ध्यान देना होता है कि कहीं से भी सामने वाले की आजादी के पर ना कतरे जाएं। हालांकि हम में इतनी समझ भी होनी चाहिए कि रिश्ते में आजादी का मतलब ये नहीं होता कि आप मनमानी करें या सामने वाले को अकेला छोड़ दें। लिबर्टी का सही मतलब ही है एक-दूसरे को खुद बने रहने की आजादी देना।

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आसान शब्दों में समझा जाए तो रिश्ते को दम घुटने वाला बनने से बचाना है तो पार्टनर्स को एक-दूसरे को खुद के फैसले लेने, अपने दोस्तों से मिलने, अपने शौक पूरे करने जैसी आजादी देनी होगी। क्योंकि आजकल के दौर में जब हर इंसान अपनी पहचान बनाना चाहता है। अब रिश्ता ऐसा होना चाहिए जो उसे रोके ना, आगे बढ़ने में मदद करे।
रिलेशनशिप में कैसे बनाए रखें 3 L का बैलेंस?
आप ये तो समझ गए होंगे कि प्यार रिश्ते को शुरू करता है, लॉयल्टी उसे मजबूती देता है और लिबर्टी उसे फलने-फूलने में मदद करता है। अगर प्यार हो लेकिन लॉयल्टी न हो, तो शक और दर्द पैदा होगा। अगर लॉयल्टी हो लेकिन लिबर्टी न हो, तो घुटन और खींचतान शुरू हो जाएगी। वहीं अगर लिबर्टी हो लेकिन प्यार न हो, तो रिश्ता बेमतलब लगने लगेगा। ऐसे में जरूरी है इन तीनों का सही संतुलन। रिलेशनशिप में इन तीनों का सही तालमेल होना उतना ही जरूरी है जितना इंसान की जिंदगी के लिए दिल का धड़कना। ऐसे में हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं जिनसे आप ये संतुलन बनाए रख सकते हैं:
1. अपने पार्टनर से खुल कर बात करें। उनसे अपनी फीलिंग्स, जरूरतें और डर सबकुछ शेयर करें। यह संवाद ही है जिससे हर समस्या का हल निकल सकता है।
2. कई बार रिलेशनशिप में दूरियां आपको काफी पास ला देती हैं। इसीलिए हर किसी को कभी-कभी अकेले वक्त जरूर बिताना चाहिए। इस वक्त में आप ईमानदारी से ये सोच सकते हैं कि आपसे कहां क्या कमी रह रही है।
3. आप अगर सही मायने में रिश्ते की मजबूती चाहते हैं तो आपको ईमानदार रहना होगा। जो बात आपके मन में हो, वही जुबान पर लाएं। विश्वास तभी कायम रहता है जब आप झूठ नहीं बोलते।
4. पार्टनर की पसंद का सम्मान करें। चाहे वह करियर हो, दोस्त हों या उनके शौक, आप सपोर्ट करें। इसके साथ ही छोटे पलों में प्यार जताने की कोशिश करें। कोई जरूरी नहीं कि आप हर दिन आई लव यू कहें लेकिन बिना कहे इस बात का एहसास तो करा ही सकते हैं।

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इस तरीके से आप रिलेशनशिप में 3 एल का बैलेंस बना सकते हैं। हमें ये समझना होगा कि आजकल के दौर में रिलेशनशिप सिर्फ प्यार पर जिंदा नहीं रह सकते। रिश्तों की सांस तब तक चलेगी जब तक उसमें लव के साथ लॉयल्टी और लिबर्टी है। इन तीनों के तालमेल के बिना रिश्ते में घुटन आने लगती है। ऊपर की बातों का निचोड़ निकालें तो यह कहना कहीं से गलत ना होगा कि रिलेशनशिप का असली मंत्र है - पार्टनर को थोड़ा प्यार दें, पूरा भरोसा रखें और खुलकर जीने दें।
