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रोज नैनी के भरोसे बच्चे को छोड़कर जाने की है मजबूरी, तो इन बातों का जरूर रखें ध्यान

नैनी के घर आने के पहले दिन से ही बच्चे को उसके साथ अकेला न छोड़ें। कुछ दिन खुद उसके साथ मौजूद रहें। नैनी को बच्चे की पसंद-नापसंद, खाने की आदतों और दिनचर्या के बारे में बताएं।

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बच्चों के लिए नैनी चुनते वक्त इन बातों का ध्यान रखना बहुत ज्यादा जरूरी है। (Photo: iStock)

आजकल नौकरी और दूसरी जिम्मेदारियों के बीच कई माता-पिता के लिए बच्चे की देखभाल के लिए नैनी रखना जरूरी हो गया है। सुबह ऑफिस जाते समय बच्चे को किसी दूसरे के भरोसे छोड़ना आसान नहीं होता। मन में कई सवाल रहते हैं- बच्चा ठीक से खाएगा या नहीं, नैनी उसका ध्यान रखेगी या नहीं और कहीं वह उसके साथ सख्ती तो नहीं करेगी? इन चिंताओं को पूरी तरह खत्म करना भले ही संभव न हो, लेकिन कुछ सावधानियां अपनाकर बच्चे की सुरक्षा और देखभाल को बेहतर बनाया जा सकता है।

नैनी रखने से पहले अच्छी तरह करें जांच

नैनी चुनते समय केवल उसके अनुभव या बातचीत के तरीके पर भरोसा न करें। उससे पहले जहां काम किया है, वहां के परिवारों से संपर्क करके फीडबैक लें। पहचान पत्र और पते की जांच करें। संभव हो तो पुलिस वेरिफिकेशन भी कराएं। उससे बच्चे की देखभाल के पुराने अनुभव, आपात स्थिति में फैसले लेने की क्षमता और काम के तरीके के बारे में खुलकर बात करें। जल्दबाजी में किसी को भी बच्चे की जिम्मेदारी न सौंपें।

बच्चे के सामने ही बनाएं भरोसे का रिश्ता

नैनी के घर आने के पहले दिन से ही बच्चे को उसके साथ अकेला न छोड़ें। कुछ दिन खुद उसके साथ मौजूद रहें। नैनी को बच्चे की पसंद-नापसंद, खाने की आदतों और दिनचर्या के बारे में बताएं। बच्चे को भी धीरे-धीरे उसके साथ समय बिताने का मौका दें। ध्यान रखें कि बच्चा उसके साथ सहज महसूस कर रहा है या नहीं। जबरदस्ती गोद में जाने या साथ खेलने के लिए दबाव न डालें।

साफ-साफ बताएं क्या करना है और क्या नहीं

नैनी को बच्चे की पूरी दिनचर्या लिखकर दें। उसे कब खाना है, कब सोना है, कौन सी दवा देनी है और किस समय खेलना है, यह सब स्पष्ट होना चाहिए। साथ ही कुछ जरूरी नियम भी तय करें। जैसे बच्चे को अकेला न छोड़ना, उसे लेकर बिना बताए बाहर न जाना, अजनबी को घर में प्रवेश न देना और मोबाइल देखते हुए बच्चे की देखभाल न करना। बच्चे को मारना, डराना या चिल्लाकर बात करना बिल्कुल स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

इमरजेंसी के लिए रखें पूरी तैयारी

घर में माता-पिता के फोन नंबर, नजदीकी रिश्तेदार का संपर्क, डॉक्टर का नंबर और जरूरी मेडिकल जानकारी लिखकर रखें। नैनी को बताएं कि बच्चा अचानक बीमार हो जाए, गिर जाए या चोट लग जाए तो क्या करना है। उसे यह भी पता होना चाहिए कि किस अस्पताल में जाना है और किसे तुरंत फोन करना है।

बच्चे के व्यवहार पर रखें नजर

घर लौटने के बाद बच्चे के साथ समय बिताएं। उससे सहज तरीके से पूछें कि दिन कैसा बीता और उसने क्या-क्या किया। छोटे बच्चे अपनी बात ठीक से नहीं बता पाते, इसलिए उनके व्यवहार पर ध्यान देना जरूरी है। अगर बच्चा अचानक बहुत डरा हुआ रहने लगे, नैनी को देखकर घबराए, नींद या खाने की आदत में बदलाव आए, तो इसे नजरअंदाज न करें। पहले बच्चे को भरोसा दिलाएं और शांत तरीके से स्थिति समझने की कोशिश करें।

कैमरे से ज्यादा जरूरी है संवाद

घर में सीसीटीवी कैमरा लगाना निगरानी का एक तरीका हो सकता है, लेकिन यह माता-पिता की मौजूदगी और बातचीत की जगह नहीं ले सकता। कैमरे के इस्तेमाल के बारे में नैनी को पहले से बताएं और उसकी निजता का सम्मान करें। दिनभर बच्चे की गतिविधियों की जानकारी लेने के लिए नियमित बातचीत भी रखें।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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