TasteAtlas World's 100 best Dishes: भारतीय खाने की चर्चा छिड़े तो अकसर बिरयानी, बटर चिकन, डोसा या पानीपुरी का जिक्र होने लगता है। लेकिन इस बार दुनिया की जुबान पर भारत के सी फूड का स्वाद चढ़ा हुआ है। फूड और ट्रैवल गाइड प्लेटफॉर्म टेस्टएटलस की 'दुनिया की 100 बेस्ट फिश डिशेज' की सूची में भारत की दो दक्षिण भारतीय फिश डिशेज ने जगह बनाई है।
भारत की लगभग 7,500 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा स्वाद का विशाल संसार भी है। केरल, तमिलनाडु, गोवा और कर्नाटक जैसे राज्यों में मछली रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा है। यहां मछली को लोकल मसालों, नारियल, इमली और पारंपरिक तकनीकों के जरिए खास अंदाज में पकाया जाता है। यही वजह है कि दक्षिण भारत की दो लोकप्रिय फिश डिशेज, करिमीन पोल्लीचथु और नेथिली 65 ने दुनिया के फूड एक्सपर्ट्स और खाने के शौकीनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
करिमीन पोल्लीचथु: केले के पत्ते में बंद केरल की खुशबू
करिमीन पोल्लीचथु का नाम सुनते ही केरल के बैकवॉटर्स और नारियल के पेड़ों से घिरे गांवों की तस्वीर आंखों के सामने उभर आती है। यह डिश केरल का सबसे फेमस सी फूड है। इसे 'करिमीन' यानी पर्ल स्पॉट मछली से बनाया जाता है। सबसे पहले मछली को लाल मिर्च, हल्दी, काली मिर्च, नींबू और दूसरे मसालों में मेरिनेट किया जाता है। इसके बाद इसे हल्का फ्राई कर मसालेदार पेस्ट के साथ केले के पत्ते में लपेटकर पकाया जाता है।
इस डिश का असली जादू इसी पारंपरिक तरीके में छिपा है। केले का पत्ता मछली में हल्की मिट्टी जैसी सुगंध और स्मोकी फ्लेवर घोल देता है। जब पत्ता खोला जाता है तो मसालों और मछली की मिली-जुली खुशबू भूख को कई गुना बढ़ा देती है। केरल में यह डिश खास मेहमानों के आने और त्योहारों पर बनाई जाती है।
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नेथिली 65: छोटी मछली, बड़ा स्वाद
दूसरी डिश है तमिलनाडु की मशहूर नेथिली 65। यह डिश बताती है कि स्वाद के लिए किसी चीज का बड़ा होना जरूरी नहीं है। इसे छोटी एन्कोवी मछलियों से तैयार किया जाता है।
मछलियों को पहले दही, नींबू, लाल मिर्च, हल्दी और अन्य मसालों के साथ मेरिनेट किया जाता है। फिर उन पर चावल का आटा लगाया जाता है और डीप फ्राई किया जाता है। नतीजा होता है बाहर से बेहद कुरकुरी और अंदर से नरम, रसदार मछली।
तमिलनाडु में इसे शाम के स्नैक या स्टार्टर के तौर पर खाया जाता है। ऊपर से नींबू की कुछ बूंदें और साथ में प्याज के स्लाइस इसका स्वाद और भी बढ़ा देते हैं। समुद्र किनारे बसे शहरों में यह डिश स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के बीच भी काफी लोकप्रिय है।
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आखिर दुनिया को क्यों पसंद आ रहा है भारतीय सी-फूड?
भारतीय समुद्री व्यंजनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां स्वाद और तकनीक दोनों में विविधता है। कहीं नारियल का इस्तेमाल होता है, कहीं इमली की खटास मिलती है तो कहीं मसालों की तीखी परत स्वाद को नया आयाम देती है।
दरअसल, यह उपलब्धि सिर्फ दो व्यंजनों की सफलता नहीं है। यह भारत की तटीय परंपराओं, स्थानीय मछुआरा समुदायों और उन घरेलू रसोइयों की भी जीत है, जिन्होंने पीढ़ियों से इन स्वादों को सहेजकर रखा है।
