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संडे सुविचार: बड़ा बनो, पर उसके सामने नहीं जिसने तुम्हें बड़ा किया है

Sunday Suvichar: चाहे इंसान कितना भी सफल, शक्तिशाली या प्रतिष्ठित क्यों न बन जाए, उसे उन लोगों के प्रति हमेशा सम्मान बनाए रखना चाहिए जिन्होंने उसके जीवन को संवारने में योगदान दिया है।

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आज का सुविचार

Sunday Suvichar: किसी भी इंसान के जीवन में अच्छे विचारों का बहुत महत्व होता है। हमारे विचार ही हमारे व्यवहार, निर्णय और व्यक्तित्व को आकार देते हैं। जैसा हम सोचते हैं, वैसा ही बनने लगते हैं। अच्छे विचार मन में सकारात्मकता, आत्मविश्वास और उत्साह पैदा करते हैं, जिससे कठिन परिस्थितियों का सामना करना आसान हो जाता है। जब व्यक्ति के मन में सकारात्मक और नेक विचार होते हैं, तो वह दूसरों के प्रति सम्मान, सहयोग और करुणा का भाव रखता है। इसी कारण से हम आपके लिए रोज एख सुविचार लेकर आते हैं। पढ़िए आज का सुविचार:

"बड़ा बनो, पर उसके सामने नहीं जिसने तुम्हें बड़ा किया है"

आज का यह सुविचार विनम्रता, सम्मान और कृतज्ञता का संदेश देता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति जीवन में सफलता हासिल न करे या ऊंचाइयों तक न पहुंचे। इसका मतलब है कि चाहे इंसान कितना भी सफल, शक्तिशाली या प्रतिष्ठित क्यों न बन जाए, उसे उन लोगों के प्रति हमेशा सम्मान बनाए रखना चाहिए जिन्होंने उसके जीवन को संवारने में योगदान दिया है।

जीवन में माता-पिता, गुरु, बड़े-बुजुर्ग और मार्गदर्शक ऐसे लोग होते हैं जो हमारे व्यक्तित्व की नींव रखते हैं। वे हमें चलना, सीखना, संघर्ष करना और सही-गलत में फर्क करना सिखाते हैं। उनकी मेहनत, त्याग और अनुभव के कारण ही हम आगे बढ़ पाते हैं। ऐसे में यदि सफलता मिलने के बाद हम अहंकार में आकर उन्हीं लोगों को कमतर समझने लगें, तो हमारी उपलब्धियों का महत्व कम हो जाता है।

यह विचार हमें याद दिलाता है कि ऊंचाई पर पहुंचना बड़ी बात है, लेकिन वहां पहुंचकर अपने संस्कारों को बनाए रखना उससे भी बड़ी बात है। एक पेड़ चाहे कितना भी ऊंचा क्यों न हो जाए, उसकी जड़ें हमेशा जमीन में ही रहती हैं। ठीक उसी तरह इंसान को भी अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलना चाहिए।

आज के समय में देखा जाता है कि सफलता मिलने के बाद कुछ लोग अपने माता-पिता, शिक्षकों या पुराने सहयोगियों को नजरंदाज करने लगते हैं। ऐसा व्यवहार रिश्तों को कमजोर तो करता ही है, व्यक्ति के चरित्र पर भी सवाल खड़े करता है। सच्ची महानता इसी में है कि उपलब्धियों के शिखर पर पहुंचकर भी व्यक्ति विनम्र बना रहे।

कुल मिलाकर, आज का यह सुविचार सिखाता है कि सफलता का असली सौंदर्य अहंकार में नहीं, उन लोगों के प्रति सम्मान और आभार में है जिन्होंने हमें उस मुकाम तक पहुंचाया। बड़ा बनना अच्छी बात है, लेकिन अपने बड़ों से बड़ा बनने की कोशिश करना नहीं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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