Sonam Wangchuk: लद्दाख की बर्फानी हवाओं और देश की राजनीति में अपनी मजबूत आवाज उठाने वाले मशहूर पर्यावरणविद् और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने आखिरकार पूरे 26 दिनों के लंबे अनशन के बाद अपना उपवास समाप्त कर दिया है। केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में उन्होंने जूस की घूंट और सूप के साथ अपनी हड़ताल खत्म की। लेकिन 26 दिनों तक बिना अन्न के रहने के बाद अब असली चुनौती उनकी सेहत को सामान्य पटरी पर लाने की है। क्या आप जानते हैं कि हफ्ते-दो हफ्ते या महीने भर भूखे रहने के बाद अचानक खाना खा लेना कैसे इंसान की सेहत को प्रभावित करता है। आइए जानते हैं कि मेडिकल साइंस के मुताबिक इतने लंबे उपवास के बाद पाचन तंत्र में क्या बदलाव आते हैं और रिकवरी डाइट कैसी होनी चाहिए।
लंबे अनशन का शरीर पर असर
लंबे समय भूखे रहने से हमारा शरीर 'स्टारवेशन मोड' में जाता है, तब क्या होता है। जब कोई व्यक्ति लगातार कई दिनों तक भोजन नहीं करता, तो उसका शरीर जीवित रहने के लिए अपने अंदरूनी संसाधनों का इस्तेमाल शुरू कर देता है। इससे कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम सामने आने लगती हैं।
इंसुलिन का स्तर गिरना: भोजन न मिलने से ब्लड शुगर और इंसुलिन का स्तर सबसे निचले स्तर पर पहुंच जाता है।
फैट और मसल की खपत: शरीर ऊर्जा के लिए पहले जमा फैट (वसा) और फिर मांसपेशियों (प्रोटीन) को तोड़ने लगता है।
इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी: पोटैशियम, फॉस्फेट और मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स का स्तर बेहद कम हो जाता है।
वजन में भारी कमी: 26 दिनों तक चले अनशन में वांगचुक का वजन करीब 11 किग्रा तक घट गया, जिसमें उनकी मसल मास (मांसपेशियों का घनत्व) को भी नुकसान पहुंचा है।
अचानक खाने का सबसे बड़ा खतरा
लंबे उपवास के बाद सबसे बड़ा मेडिकल खतरा होता है रिफीडिंग सिंड्रोम (Refeed Syndrome)। जब कई दिनों से भूखे शरीर को अचानक कार्बोहाइड्रेट या भारी भोजन दिया जाता है, तो शरीर में इंसुलिन का स्तर एकाएक बहुत तेजी से बढ़ता है। इसके चलते खून में मौजूद पोटैशियम, मैग्नीशियम और फॉस्फेट तेजी से कोशिकाओं के अंदर चले जाते हैं। खून में इनकी कमी होते ही हार्ट फेलियर, सांस लेने में तकलीफ, दौरे पड़ना या कोमा जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
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कैसी होती है रिकवरी डाइट?
डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट्स के अनुसार लंबे उपवास के बाद आहार को 4 चरणों (Phases) में बांटकर शुरू किया जाता है। इसमें पहला चरण - तरल आहार, दूसरा चरण - मऊ/लिक्विड फूड, तीसरा चरण- सुपाच्य ठोस भोजन और चौथा चरण- सामान्य खाना होता है।
पहले 24 से 48 घंटे में क्या खाएं
फास्टिंग के बाद शुरुआती दो दिनों में ऐसे खाद्य पदार्थ चुनें जो पचाने में आसान हों। जैसे-
- मूंग दाल की खिचड़ी
- उबली हुई सब्जियां
- दही (यदि डॉक्टर मना न करें)
- पका हुआ केला या पपीता
- दलिया या ओट्स
- पतली दाल और मुलायम चावल
इन खाद्य पदार्थों से शरीर को ऊर्जा भी मिलती है और पाचन तंत्र पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ता है।
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किन बातों से पूरी तरह परहेज जरूरी है
लंबे अनशन के बाद मसालेदार और तला-भुना खाना नहीं खाना चाहिए। क्योंकि इस समय पेट की आंतों की अंदरूनी परत कमजोर हो चुकी होती है, ऐसे में तीखा खाना एसिडिटी और अल्सर का कारण बन सकता है। इसके अलावा डेयरी और भारी फैट जैसे - मक्खन, घी या भारी दूध का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इन्हें पचाने वाले एंजाइम्स शरीर में कम बन रहे होते हैं, जिससे दस्त या गंभीर पेट दर्द हो सकता है।
सोनम वांगचुक जैसे सत्याग्रहियों की अनशन यात्रा जितनी मानसिक इच्छाशक्ति की परीक्षा होती है, उपवास के बाद का रिकवरी फेज उससे कहीं अधिक वैज्ञानिक सावधानी की मांग करता है। शरीर को दोबारा सामान्य खानपान से जोड़ने की यह कला 'हौसले और विज्ञान' के अद्भुत मेल का सटीक उदाहरण है।
