Shayari of the Day (आज की शायरी): गुलजार हिंदी-उर्दू साहित्य और भारतीय सिनेमा के ऐसे रचनाकार हैं, जिनकी कलम में सादगी और गहराई साथ-साथ चलती है। उनका असली नाम सम्पूर्ण सिंह कालरा है। उन्होंने गीतकार, शायर, पटकथा लेखक और फिल्म निर्देशक के रूप में अलग पहचान बनाई। उनकी शायरी में रोजमर्रा की जिंदगी के छोटे-छोटे एहसास बड़ी खूबसूरती से उभरते हैं। फिर चाहे वह बारिश की बूंदें हों, खामोशियां हों या बिछड़ने का दर्द।
गुलजार की शायरी की खासियत है कि वह जटिल भावनाओं को बेहद सरल शब्दों में कह देते हैं। उनके शेर समय के साथ और भी प्रासंगिक होते जा रहे हैं, क्योंकि वे इंसानी रिश्तों और एहसासों की सच्ची तस्वीर पेश करते हैं। आज की शायरी में पढ़ें गुलजार की कलम से निकला एक काफी मशहूर शेर:
“कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ, किसी की आंख में हम को भी इंतिज़ार दिखे।”
यह शेर एक गहरी मानवीय चाहत को बेहद सादगी से बयान करता है। पहली पंक्ति में गुलजार की तमन्ना है कि कोई तो ऐसा हो जो अचानक, हैरानी और खुशी के साथ उसकी ओर देखे। चौंक के देखना उस अनपेक्षित खुशी की बात करता है, जो किसी अपने को सामने देखकर महसूस होती है। शायर मानो भीड़ में खड़ा है, मगर अदृश्य सा। वह चाहता है कि उसकी मौजूदगी किसी के लिए खास बने, कोई उसे यूं देखे जैसे उसके आने से पल बदल गया हो।
शेर का दूसरा मिसरा इस चाहत को और गहरा कर देता है। किसी की आंख में हम को भी इंतिज़ार दिखे - ये शब्द उस दर्द को उजागर करते है जो उपेक्षा से जन्म लेते हैं। शायर की इच्छा है कि जैसे वह किसी का इंतजार करता है, वैसे ही कोई उसके लिए भी बेचैन हो। किसी की आंखों में अपने लिए प्रतीक्षा देखना दरअसल स्वीकार्यता और प्रेम की सबसे सच्ची निशानी है।
पूरा शेर अकेलेपन और अपनापन पाने की प्यास का बयान है। यह हर उस दिल की आवाज है जो भीड़ में रहकर भी किसी की नजर में खास बनना चाहता है। यहां प्रेम सिर्फ साथ होना भर नहीं है, ये तो उस एहसास का नाम है जहां कोई आपकी राह देखता हो, आपकी कमी महसूस करता हो। यही इंतजार इंसान को उसकी अहमियत का एहसास दिलाता है।
पढें गुलजार के कुछ और बेहतरीन शेर:
1. आप के बा'द हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है
2. आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई
3. वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
आदत इस की भी आदमी सी है
4. कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ
किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
5. ज़िंदगी यूं हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा
