Sultan Ibrahim Ottoman Empire: दुनिया का इतिहास तमाम सनकी सुल्तानों से भरा पड़ा है। मुगल हों, मंगोल हों या फिर टर्किश, हर जगह ऐसे सनकी सुल्तानों की दास्तान सदियों तक गूंजती रही है। ऐसा ही एक सनकी सुल्तान था- इब्राहिम। तुर्की के उस्मानी साम्राज्य में 1640 से 1648 तक इब्राहिम सुल्तान रहा। इब्राहिम जब पैदा हुआ तो उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं थी। उसकी हरकतें भी वैसी ही रहा करती थीं। इतिहासकारों ने इब्राहिम के सनकीपन को देखते हुए उसे पागल इब्राहिम का नाम दिया है।
सुल्तान इब्राहिम की मां का नाम कौसम अनास्तासिया था। वह मूल रूप से यूनानी थीं। इब्राहिम के पिता अहमद प्रथम ने कौसम को अपने हरम में दासी बनाकर रखा था। बाद में कौसम ने अहमद प्रथम को इतना खुश किया कि वह रानी बन गई। 5 नवंबर को कौसम अनास्तासिया ने अहमद प्रथम के बेटे इब्राहिम को जन्म दिया। जन्म के दो साल बाद ही इब्राहिम के पिता की मृत्यु हो गई। अहमद प्रथम के निधन के बाद इब्राहिम के चाचा मुस्तफा प्रथम को तुर्की का सुल्तान बनाया गया। राजगद्दी पर बैठते ही मुस्तफा ने इब्राहिम को उसके भाइयों और मां के साथ पुराने किले भेज दिया।
सत्ता के लालच में इब्राहिम के 3 भाइयों का कत्ल कर दिया गया। इब्राहिम की दिमागी हालत देख उसे जिंदा छोड़ दिया था। आगे चलकर वह तुर्की साम्राज्य का सुल्तान बना और 8 साल तक पद पर रहा। उस काल के दूसरे सुल्तानों की तरह इब्राहिम के हरम की चर्चा भी दूर-दूर तक थी। उसके हरम में सैकड़ों दासियां थीं। इन दासियों में एक से बढ़कर एक सुंदर नैन-नक्श, पतली कमर, आकर्षक फिगर वाली होती थीं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इब्राहिम को कुछ और ही पसंद था।
जब इब्राहिम गद्दीनशीं हुआ तो उसकी मां ने वंश के आगे बढ़ने की चाहत में अपने बेटे के लिए एक से बढ़कर एक सुंदरियां चुनीं। सुंदर-सुंदर महिलाएं मंगवाकर हरम में रखवाई गईं। सुंदर काया, पतली कमर। लेकिन सुल्तान की दिलचस्पी इन महिलाओं में थी ही नहीं! यह देख मां को आश्चर्य होता था। सुल्तान रात में मोटी और भरे शरीर वाली रखैलों को बुलवाता। देर सबेर सुल्तान की मां को बेटे की पसंद का अहसास हो गया। हरम की दासियों के लिए कई तरह के दिशा निर्देश जारी किये गए।
सबसे पहले तो इब्राहिम की मां ने हरम में दबाकर मिठाई खाने का फरमान जारी किया। आदेश दिया गया कि दासियों के लिए खानपान में मीठे के खूब इंतजाम करवाए। दासियों को थाली भर-भर के खाना दिया जाता था। उन्हें आदेश था कि थाली को खाली करके ही उठना है। उन्हें आदेश था कि वो खूब खाएं और भरपूर आराम करें ताकि उनका वजन बढ़ सके। दासियों को 150 किलो तक वजन बढ़ाने का टारगेट दिया गया था जिसे उन्हें पूरा करना ही पड़ता था। इतना ही नहीं सुल्तान की पसंद का ख्याल रखते हुए उसकी मां के आदेश पर दूर-दराज देशों से भी मोटी-मोटी महिलाएं मंगवाई गईं। हरम में भेजने से पहले बस एक शर्त होती थी कि दासी का वजन कम से कम 150 किलो हो। देखते-देखते इब्राहिम के हरम में एक से बढ़कर एक वजनी महिलाएं नजर आने लगीं। सुल्तान इन्ही में से रोज किसी ना किसी को सहवास के लिए चुनता।
ऐसा नहीं था कि सुल्तान को सिर्फ सहवास के लिए ही मोटी दासियां पसंद थीं। उसने जिससे शादी की उसने तो मोटापे का रिकॉर्ड ही तोड़ दिया था। दरअसल सुल्तान इब्राहिम ने जिसे बेगम बनाया उसका नाम शकर पारा था। शकर पारा का वजन 230 किलो था। सुल्तान प्यार से उसे मिश्री कहा करता था। हालांकि शकर पारा का जो वजन सुल्तान को भाया था वही वजन उसकी मृत्यु का कारण भी बना। शादी के कुछ दिनों बाद ही हृदयाघात से शकरपारा का निधन हो गया। उस समय के वैद्यों ने बताया कि वजन बहुत ज्यादा होना महारानी की मौत कारण बना।
शकर पारा के निधन के बाद सुल्तान की पसंद बदल गई। वह पतली दासियों के साथ सहवास करने लगा। कुछ समय बाद उसमें छरहरी काया वाली हैटिस तुरहान से शादी रचा ली। तमाम दूसरी औरतों से मिलाकर सुल्तान की 18 संतानें हुईं। 1948 में एक बीमारी के चलते सुल्तान इब्राहिम ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। हालांकि उसके निधन के सालों बाद तक मोटी रखैलों के उसके शौक के चर्चे होते रहे।
