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Saiyaara: शायरी में क्या होता है सैयारा का मतलब, क्यों शायरों के दिल के बहुत करीब है ये शब्द?

What is Saiyaara Meaning: अल्लामा इकबाल का एक शेर है कि, 'पीर-ए-गर्दूं ने कहा सुन के कहीं है कोई, बोले सय्यारे सर-ए-अर्श-ए-बरीं है कोई।' इसी तरह से बहुत से गीत, शायरी और नज्मों में सैयारा का इस्तेमाल हुआ है। इनमें सैयारा कहीं एक मुसाफिर है जो अपने भीतर की रोशनी से रास्ता ढूंढती है तो कहीं इश्क और आजादी का प्रतीक।

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क्या होता है सैयारा का मतलब (Photo: YRF)

Saiyaara Meaning In Hindi: हाल ही में मोहित सूरी की नई फिल्म सैयारा रिलीज हुई है। फिल्म युवाओं को खूब पसंद आ रही है। मीडिया से सोशल मीडिया तक में इस फिल्म की चर्चा है। सैयारा के गाने भी लोगों की जुबान पर चढ़ गए हैं। हालांकि फिल्म को मिल रहे इतने जबरदस्त रेस्पॉन्स के बीच बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर सैयारा मतलब होता क्या है। हम ऐसे लोगों की मुश्किल को आसान कर रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है सैयारा का मतलब और साहित्य, संगीत और कला की दुनिया में कैसे होता है इसका इस्तेमाल।

बेहद खूबूसरत शब्द सैयारा के कई अर्थ हैं। वैसे तो यह शब्द अरबी भाषा का है जिसका मूल अर्थ होता है तारा, सितारा या आकाश में चलने वाली कोई चीज। लेकिन अरबी भाषा का यह शब्द जब गीतों और शायरी में इस्तेमाल होता है तो इसके मायने बहुत ज्यादा बदल जाते हैं। शायरी और गीतों में सैयारा को एक प्रतीक के तौर पर प्रयोग किया जाता है। मसलन अगर किसी इंसान को तारे जैसा चमकता हुआ, दूर होता हुआ या अनछुआ दिखाना हो तो वहां सैयारा का इस्तेमाल किया गया है। उदाहरण के तौर पर फिल्म 'एक था टाइगर' के इस गाने के बोल पढ़िए:

आसमां तेरा मेरा हुआ, ख़्वाब की तरह धुंआ धुंआ

आसमां तेरा मेरा हुआ, सांस की तरह रुआं रुआं

जाए जहां तू जाए पाये मुझे ही पाये

साये ये मेरे हैं तुझ में समाए

सैयारा मैं सैयारा

सितारों के जहां में मिलेंगे अब यारा

इस खूबसूरत गीत में सैयारा मतलब आजाद रूह से है। ऐसी रूह जो आजाद हो चुकी है। अब पूरा आसामान इस रूह का है। वह अपने प्रेमी से कह रहा है कि आसमान में तुम जहां भी रहोगी मुझे पा लोगी। मैं एक टूटा हुआ तारा बनकर तुम्हारे साये की तरह साथ रहूंगा। है ना खूबसूरत।

सैयारा शायरों के दिल के बहुत करीब है। दरअसल ये उन्हें कई तरह के मतलब गढ़ने की आजादी देता है। जैसे अल्लामा इकबाल का एक शेर है कि, 'पीर-ए-गर्दूं ने कहा सुन के कहीं है कोई, बोले सय्यारे सर-ए-अर्श-ए-बरीं है कोई।' इसी तरह से बहुत से गीत, शायरी और नज्मों में सैयारा का इस्तेमाल हुआ है। इनमें सैयारा कहीं एक मुसाफिर है जो अपने भीतर की रोशनी से रास्ता ढूंढती है तो कहीं इश्क और आजादी का प्रतीक। सैयारा वह टूटा तारा है जो दूर होते हुए भी दिल के बहुत पास महसूस होता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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