Ram Prasad Bismil: सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है.., खून में उबाल ला देंगी राम प्रसाद बिस्मिल की ये 5 कविताएं
- Authored by: Suneet Singh
- Updated Dec 19, 2025, 09:01 AM IST
Ram Prasad Bismil ki Kavita (राम प्रसाद बिस्मिल की कविताएं): 98 साल पहले आज के ही दिन भारत मां के वीर सपूत और जांबाज क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल वतन की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए थे। बिस्मिल कवि हृदय के थे। उन्होंने कई शानदार कविताएं भी लिखी हैं।
राम प्रसाद बिस्मिल की कविताएं
Ram Prasad Bismil Poems in Hindi: राम प्रसाद बिस्मिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महान क्रांतिकारी, कवि और राष्ट्रभक्त थे। उनका जन्म 11 जून 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ था। बचपन से ही उनके मन में देशभक्ति की भावना प्रबल थी और वे अन्याय व गुलामी के विरुद्ध खड़े होने का साहस रखते थे। बिस्मिल हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के प्रमुख सदस्य थे और क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते थे। 19 दिसंबर 1927 को मात्र 30 वर्ष की आयु में उन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
राम प्रसाद बिस्मिल एक संवेदनशील कवि भी थे। उनकी रचनाओं में देशप्रेम, बलिदान और आत्मसम्मान का गजब रंग दिखाई देता है। 'सरफरोशी की तमन्ना' जैसे गीतों से उन्होंने युवाओं में क्रांति की चेतना जगाई। उनका जीवन आज भी साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता है। आज राम प्रसाद बिस्मिल की पुण्यतिथि पर पढ़िए उनकी 5 प्रमुख कविताएं:
1. चर्चा अपने क़त्ल का अब दुश्मनों के दिल में है
चर्चा अपने क़त्ल का अब दुश्मनों के दिल में है,
देखना है ये तमाशा कौन सी मंजिल में है ?
कौम पर कुर्बान होना सीख लो ऐ हिन्दियो
ज़िन्दगी का राज़े-मुज्मिर खंजरे-क़ातिल में है
साहिले-मक़सूद पर ले चल खुदारा नाखुदा
आज हिन्दुस्तान की कश्ती बड़ी मुश्किल में है
दूर हो अब हिन्द से तारीकि-ए-बुग्जो-हसद
अब यही हसरत यही अरमाँ हमारे दिल में है
बामे-रफअत पर चढ़ा दो देश पर होकर फना
'बिस्मिल' अब इतनी हविश बाकी हमारे दिल में है
2. सर फ़िदा करते हैं कुरबान जिगर करते हैं
सर फ़िदा करते हैं कुरबान जिगर करते हैं,
पास जो कुछ है वो माता की नजर करते हैं,
खाना वीरान कहाँ देखिये घर करते हैं!
खुश रहो अहले-वतन! हम तो सफ़र करते हैं,
जा के आबाद करेंगे किसी वीराने को !
नौजवानो ! यही मौका है उठो खुल खेलो,
खिदमते-कौम में जो आये वला सब झेलो,
देश के वास्ते सब अपनी जबानी दे दो,
फिर मिलेंगी न ये माता की दुआएँ ले लो,
देखें कौन आता है ये फ़र्ज़ बजा लाने को ?
ऐ मातृभूमि तेरी जय हो, सदा विजय हो
ऐ मातृभूमि तेरी जय हो, सदा विजय हो
प्रत्येक भक्त तेरा, सुख-शांति-कान्तिमय हो
अज्ञान की निशा में, दुख से भरी दिशा में
संसार के हृदय में तेरी प्रभा उदय हो
तेरा प्रकोप सारे जग का महाप्रलय हो
तेरी प्रसन्नता ही आनन्द का विषय हो
वह भक्ति दे कि 'बिस्मिल' सुख में तुझे न भूले
वह शक्ति दे कि दुःख में कायर न यह हृदय हो
3. तराना-ए-बिस्मिल
बला से हमको लटकाए अगर सरकार फांसी से,
लटकते आए अक्सर पैकरे-ईसार फांसी से।
लबे-दम भी न खोली ज़ालिमों ने हथकड़ी मेरी,
तमन्ना थी कि करता मैं लिपटकर प्यार फांसी से।
खुली है मुझको लेने के लिए आग़ोशे आज़ादी,
ख़ुशी है, हो गया महबूब का दीदार फांसी से।
कभी ओ बेख़बर तहरीके़-आज़ादी भी रुकती है?
बढ़ा करती है उसकी तेज़ी-ए-रफ़्तार फांसी से।
यहां तक सरफ़रोशाने-वतन बढ़ जाएंगे क़ातिल,
कि लटकाने पड़ेंगे नित मुझे दो-चार फांसी
5. गुलामी मिटा दो
दुनिया से गुलामी का मैं नाम मिटा दूंगा,
एक बार ज़माने को आज़ाद बना दूंगा।
बेचारे ग़रीबों से नफ़रत है जिन्हें, एक दिन,
मैं उनकी अमरी को मिट्टी में मिला दूंगा।
यह फ़ज़ले-इलाही से आया है ज़माना वह,
दुनिया की दग़ाबाज़ी दुनिया से उठा दूंगा।
ऐ प्यारे ग़रीबो! घबराओ नहीं दिल में,
हक़ तुमको तुम्हारे, मैं दो दिन में दिला दूंगा।
बंदे हैं ख़ुदा के सब, हम सब ही बराबर हैं,
ज़र और मुफ़लिसी का झगड़ा ही मिटा दूंगा।
जो लोग ग़रीबों पर करते हैं सितम नाहक़,
गर दम है मेरा क़ायम, गिन-गिन के सज़ा दूंगा।
हिम्मत को ज़रा बांधो, डरते हो ग़रीबों क्यों?
शैतानी क़िले में अब मैं आग लगा दूंगा।
ऐ ‘सरयू’ यक़ीं रखना, है मेरा सुख़न सच्चा,
कहता हूं, जुबां से जो, अब करके दिखा दूंगा।
नए साल 2026 की ढेरों शुभकामनाएं। हमारे साथ देखें नए साल के खास बधाई संदेश, नए साल के संस्कृत शुभेच्छा संदेश, घर के बड़ों को हैपी न्यू ईयर कैसे कहें, न्यू ईयर विशेज फॉर हस्बैंड, वाइफ, बॉस, लव, नए साल के मोटिवेशनल बधाई संदेश, नए साल की देशभक्ति भरी विशेज। पढ़ें हैपी न्यू ईयर का जवाब कैसे दें। साथ ही देखें आज का राशिफल