Pehli Barish Par Shayari (पहली बारिश पर शायरी): पहली बारिश का एहसास किसी पुराने खत की तरह होता है, जिसे बरसों बाद खोलो, तो यादें भीग जाती हैं। यही वजह है कि शायरी की दुनिया में पहली बारिश को बेहद खास दर्जा मिला है। ये सिर्फ पानी नहीं, रूह की ठंडी सांसों जैसी होती है। जब तपती दुपहरी के बाद काले बादल उमड़ते हैं और पहली बूंद ज़मीन को छूती है, तो मिट्टी की सोंधी खुशबू के साथ दिल में दबी नज़्में भी जाग उठती हैं। शायरों ने पहली बारिश को कभी प्रेमिका की मुस्कान कहा, कभी जुदाई की आहट, तो कभी बचपन की सादगी की याद। गुलज़ार की कोमल पंक्तियों में पहली बारिश चुपचाप बातें करती है, तो राहत इंदौरी की शायरी में ये इश्क़ की शुरुआत बन जाती है। बारिश उन अल्फ़ाज़ को पनाह देती है जो कहे नहीं गए और उन ख्वाबों को ज़िंदा करती है जो कभी भीगे थे।
Pehli Barish Shayari in Hindi | मौसम की पहली बारिश पर शायरी | पहली बारिश शायरी
1. बारिश की बूंदों में भी एक साज़ है,
हर टपकती बूंद में तेरा नाम है।
- बशीर बद्र
2. उसकी हंसी और पहली बारिश,
दोनों ही मेरे जीवन के सबसे हसीन हादसे थे।
- साहिर लुधियानवी
3. पहली बारिश की खुशबू में जो बात है,
वो किसी इत्र में कहां।
- अहमद फ़राज़
4. कागज़ की कश्ती थी और बारिश का पानी,
ये तो बचपन का कोई खेल पुराना निकला।
- निदा फ़ाज़ली
5. भीगने दो इन हवाओं को जरा,
बरसों बाद पहली बारिश आई है।
- जावेद अख्तर
6. बरसात की वो पहली फुहार याद है,
उसकी भीगी पलकें और इज़हार याद है।
- राहत इंदौरी
7. भीगते जिस्म की ख़ुशबू से महक उठी थी रूह,
वो पहली बारिश भी क्या समां लाया था।
- वसीम बरेलवी
8. बरसात में तन्हा दिल और भी भीग जाता है,
भीतर तक सिहर जाता है जब कोई नाम आता है।
- गुलज़ार
9. वो जो बरसात में भीग कर नाची थी,
आज फिर से रिमझिम फुहारें याद आईं।
- क़तील शिफ़ाई
10. बारिश आई तो छत टपकने लगी,
याद आई उसकी जो छांव थी मेरी।
- दुष्यंत कुमार
11. पहली बारिश में वो साथ होता तो,
आज भीगने का मजा कुछ और होता।
- मिर्ज़ा ग़ालिब
12. बूंदें कह रही थीं..चलो फिर वही कहानी लिखें,
जहां बारिश थी और तुम थे।
- शिवम अंगद
13. जब भी पहली बारिश में तन भीगा,
मन तेरी याद में घुलता गया।
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
14. चुपके से भीगा था दिल बारिश में,
किसी ने देख लिया इश्क़ का सबूत।
- जॉन एलिया
उम्मीद करते हैं कि ये शेर आपको जरूर पसंद आए होंगे। पहली बारिश पर लिखी गई शायरी हमें यह एहसास कराती है कि भावनाएं मौसम की तरह ही लौटती हैं..भीगने, सिहरने और फिर खिलने के लिए।
