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मिठाई के रंग से कैसे पहचानें मिलावट- शुद्ध और ताजी मिठाई खरीदने के लिए हलवाई की दुकान पर इन 8 बातों का रखें ध्यान

How to know adulteration in sweets: मिठाई का रंग कैसे खोलता है मिलावट का राज? हलवाई की दुकान से मिठाई खरीदते समय इन 8 बातों पर ध्यान दें। जानें मिलावटी मिठाई की पहचान और शुद्ध मिठाई खरीदने के आसान टिप्स।

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मिठाई के रंग से कैसे करें मिलावट की जांच, शुद्ध और ताजी मिठाई कैसे खरीदें (AI Image)

How to know adulteration in sweets: दिवाली या किसी भी त्योहार के मौके पर बाजार में सजी रंग-बिरंगी मिठाइयां देखकर अक्सर मन ललचा जाता है। चमकदार रसीले गुलाब जामुन, एकदम सफेद रसगुल्ले, चटक नारंगी बूंदी और खूबसूरत रंग की बर्फी देखते ही हम इन्हें खरीदने का मन बना लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मिठाई का यह आकर्षक रंग उसकी शुद्धता पर भी सवाल खड़ा कर सकता है?

दरअसल, मिठाई का रंग, उसकी चमक और बनावट कई बार उसकी गुणवत्ता के बारे में कुछ संकेत दे सकते हैं। खासकर तब, जब रंग जरूरत से ज्यादा चटक हो या मिठाई देखने में असामान्य रूप से चमकदार लगे। हालांकि, सिर्फ रंग देखकर किसी मिठाई को मिलावटी घोषित नहीं किया जा सकता। इसके लिए सही जांच जरूरी है।

ऐसे में अगली बार हलवाई की दुकान पर मिठाई खरीदने जाएं, तो केवल स्वाद या दिखावट पर भरोसा न करें। इन 8 बातों पर ध्यान देकर आप खराब गुणवत्ता वाली या संदिग्ध मिठाई खरीदने से बच सकते हैं।

1. मिठाई का रंग जरूरत से ज्यादा चटक तो नहीं

मिठाई खरीदते समय सबसे पहले उसके रंग पर नजर डालें। अगर केसरिया मिठाई बहुत ज्यादा चमकदार नारंगी दिख रही है या पीली मिठाई का रंग असामान्य रूप से तेज है, तो थोड़ा सतर्क हो जाएं। इसी तरह हरे रंग की मिठाई में जरूरत से ज्यादा चमक भी ध्यान देने वाली बात है।

मिठाई में इस्तेमाल होने वाले कुछ खाद्य रंग तय मानकों के तहत इस्तेमाल किए जा सकते हैं, लेकिन गैर-अनुमत रंगों का इस्तेमाल सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए बहुत ज्यादा चटकीले रंग को देखकर मिठाई खरीदने की जल्दबाजी न करें।

2. सफेद मिठाई का रंग भी देता है संकेत

रसगुल्ला, कलाकंद, रसमलाई और सफेद बर्फी जैसी मिठाइयों को देखकर उनकी ताजगी का अंदाजा लगाने की कोशिश करें। अगर मिठाई असामान्य रूप से सफेद, चमकदार या एक जैसी दिख रही है, तो उसकी गुणवत्ता पर सवाल करना गलत नहीं है।

हालांकि, सफेद रंग का मतलब मिलावट नहीं होता। दूध और छेने से बनी मिठाइयों का रंग उनकी सामग्री और बनाने के तरीके के हिसाब से अलग हो सकता है। इसलिए केवल सफेदी को शुद्धता का पैमाना न बनाएं।

3. मिठाई पर जरूरत से ज्यादा चमक तो नहीं

कई बार मिठाइयों पर चांदी का वर्क, घी या चाशनी की वजह से चमक दिखाई देती है। यह सामान्य भी हो सकता है। लेकिन अगर मिठाई की सतह पर असामान्य चमक है या उस पर रंग की परत जैसी दिखाई दे रही है, तो दुकानदार से उसकी सामग्री के बारे में पूछें।

खासकर वर्क लगी मिठाई खरीदते समय यह देखना जरूरी है कि चांदी का वर्क खाद्य उपयोग के लिए उपयुक्त है या नहीं। शक होने पर ऐसी मिठाई लेने से बचें।

4. मिठाई की खुशबू से भी पहचानें उसकी ताजगी

अच्छी मिठाई की अपनी एक खास खुशबू होती है। दूध, घी, इलायची या केसर की हल्की महक आपको महसूस हो सकती है। इसके उलट अगर मिठाई से खट्टी, बासी या अजीब सी गंध आ रही है, तो उसे खरीदने से बचें।

खासकर खोया, पेड़ा और मिल्क केक जैसी मिठाइयों में यह बात ध्यान रखने वाली है। दूध से बनी मिठाइयां जल्दी खराब हो सकती हैं। इसलिए इनकी खुशबू और ताजगी पर विशेष ध्यान दें।

5. मिठाई की बनावट में तो कोई गड़बड़ी नहीं

मिठाई को देखकर उसकी बनावट का अंदाजा भी लगाया जा सकता है। बर्फी बहुत ज्यादा चिपचिपी हो, पेड़े पर असामान्य नमी हो या कलाकंद से अजीब तरह का तरल निकल रहा हो, तो सावधान हो जाएं।

इसी तरह रसगुल्ले का बहुत ज्यादा सख्त होना या छेने की मिठाई का जरूरत से ज्यादा सूखा लगना भी उसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर सकता है। हर मिठाई की बनावट अलग होती है। इसलिए उसकी सामान्य बनावट से हटकर दिखने वाले बदलावों पर ध्यान दें।

6. दुकान की साफ-सफाई को न करें नजरअंदाज

मिठाई कितनी भी सुंदर क्यों न दिख रही हो, अगर दुकान में साफ-सफाई नहीं है तो उसे खरीदने से बचें। देखें कि मिठाइयां खुली रखी हैं या ढकी हुई हैं। उन पर मक्खियां तो नहीं बैठ रही हैं? दुकानदार मिठाई उठाने के लिए साफ चिमटे या दस्ताने का इस्तेमाल कर रहा है या नहीं?

मिठाई रखने वाली ट्रे और काउंटर भी साफ होने चाहिए। दुकानदार के हाथों की सफाई और मिठाई को संभालने का तरीका भी काफी कुछ बताता है। याद रखें, मिलावट ही खाने को असुरक्षित नहीं बनाती। गंदगी और गलत तरीके से रखे जाने के कारण भी मिठाई में बैक्टीरिया पनप सकते हैं।

7. मिठाई कब बनी है और कितने दिन तक खा सकते हैं

मिठाई खरीदते समय दुकानदार से उसकी बनने की तारीख और इस्तेमाल की आखिरी तारीख जरूर पूछें। यह सवाल खासतौर पर दूध और खोया से बनी मिठाइयों के लिए जरूरी है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की गाइडलाइन के मुताबिक मिठाइयों की शेल्फ लाइफ उनके प्रकार और सामग्री पर निर्भर करती है। दूध से बनी कुछ मिठाइयां जल्दी खराब होती हैं। FSSAI की गाइडेंस में भी मिठाइयों की सीमित शेल्फ लाइफ और सही स्टोरेज पर जोर दिया गया है। इसलिए दुकान में कई दिनों से रखी मिठाई खरीदने से बचें। पैक्ड मिठाई लेते समय पैकेट पर लिखी मैन्युफैक्चरिंग डेट, बेस्ट बिफोर और स्टोरेज निर्देश जरूर पढ़ें।

8. दुकानदार से FSSAI लाइसेंस और सामग्री की जानकारी लें

मिठाई खरीदते समय दुकानदार से यह पूछने में संकोच न करें कि मिठाई किस चीज से बनी है। क्या इसमें शुद्ध घी इस्तेमाल हुआ है या वनस्पति? क्या इसमें कोई आर्टिफिशियल कलर मिलाया गया है?

खुले में बिकने वाली मिठाइयों के मामले में दुकान पर जरूरी जानकारी प्रदर्शित होनी चाहिए। दुकानदार का FSSAI लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नंबर भी चेक करें। पैक्ड मिठाई खरीद रहे हैं, तो पैकेट पर FSSAI नंबर, सामग्री और जरूरी लेबलिंग देखें।

क्या मिठाई में मिलावट की घर पर भी हो सकती है जांच

कई लोग मिठाई खरीदने के बाद घर पर ही उसकी शुद्धता जांचने के तरीके खोजते हैं। इंटरनेट पर पानी, आयोडीन और दूसरे घरेलू तरीकों से मिलावट पकड़ने के कई दावे मिलते हैं। लेकिन हर मिठाई और हर तरह की मिलावट के लिए एक ही टेस्ट काम नहीं करता।

FSSAI ने खाद्य पदार्थों में मिलावट की पहचान के लिए DART यानी Detect Adulteration with Rapid Test नाम से उपभोक्ता जागरूकता संबंधी जानकारी और वीडियो उपलब्ध कराए हैं। हालांकि, घरेलू जांच शुरुआती संकेत दे सकती है, लेकिन किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट की पक्की पुष्टि के लिए लैब टेस्ट जरूरी है।

मिठाई खरीदते समय इन बातों का रखें खास ध्यान

त्योहारों के मौसम में मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में दुकानों पर पहले से तैयार मिठाइयों का स्टॉक भी ज्यादा हो सकता है। FSSAI ने भी त्योहारों के दौरान दूध, खोया और मिठाइयों में मिलावट रोकने के लिए विशेष निगरानी और जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

इसलिए मिठाई खरीदते समय सिर्फ उसका रंग और कीमत न देखें। उसकी खुशबू, बनावट, ताजगी और दुकान की साफ-सफाई भी परखें। सबसे जरूरी बात, चमकदार दिखने वाली हर मिठाई अच्छी नहीं होती और फीके रंग वाली हर मिठाई मिलावटी नहीं होती। अगर मिठाई का रंग, स्वाद, गंध या बनावट संदिग्ध लगे, तो उसे खाने से बचें। जरूरत पड़ने पर खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत भी कर सकते हैं।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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