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किताब कैफे: जब लगे बेकार जा रही मेहनत, हावी होने लगे हार, तो इन 6 किताबों को बना लें दोस्त

किताब कैफे(Kitaab Cafe): हर बार असफलता मिलने से निराशा तो होती है, लेकिन इन निराशाओं से जो घबरा गया वो कभी सफल नहीं हो पाता।

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Kitaab Cafe: हार के बाद उम्मीद को फिर से जिंदा कर देती हैं ये 6 किताबें

किताब कैफे(Kitaab Cafe): कभी-कभी जिंदगी हमें उस मोड़ पर ले आती है, जब लगने लगता है कि सारी मेहनत बेकार जा रही है। जिस काम में लगे हैं वहां बार-बार असफलता हाथ लगती है या फिर लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों का कोई नतीजा दिखाई नहीं देता। ऐसे समय में हम खुद पर ही सवाल उठाने लगता है। हमें सोचने लगते हैं कि इन कोशिशों का क्या ही फायदा। इतनी मेहनत खामखा क्यों की जाए।

हर बार असफलता मिलने से निराशा तो होती है, लेकिन इन निराशाओं से जो घबरा गया वो कभी सफल नहीं हो पाता। तो अगर आपको भी कभी ऐसा लगे कि मेरी मेहनत बेकार जा रही है, तो इन किताबों में से कोई भी एक बार जरूर पढ़ें:

द अलकेमिस्ट (पाउलो कोएल्हो)

यह एक चरवाहे लड़के सैंटियागो की कहानी है, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए लंबी यात्रा पर निकलता है। रास्ते में उसे कई असफलताएं मिलती हैं, लेकिन वह हार नहीं मानता। यह किताब सिखाती है कि कभी-कभी मंजिल से ज्यादा महत्वपूर्ण सफर होता है।

मैन्स सर्च फॉर मीनिंग (विक्टर फ्रैंकल)

नाजी यातना शिविरों में बिताए गए अपने अनुभवों के आधार पर लिखी गई यह किताब बताती है कि इंसान कितनी भी कठिन परिस्थितियों में जीने का अर्थ खोज सकता है। जब सब कुछ खत्म होता हुआ दिखे, तब भी उम्मीद बची रह सकती है।

एटॉमिक हैबिट्स (जेम्स क्लियर)

हम हमेशा बड़ी सफलता चाहते हैं और छोटे बदलावों को नजरंदाज कर देते हैं। यह किताब समझाती है कि रोज की छोटी-छोटी आदतें ही बड़े बदलाव लाती हैं। अगर आपकी मेहनत का परिणाम अभी नहीं दिख रहा, तो यह किताब धैर्य रखना सिखाती है।

गोदान (प्रेमचंद)

इस कहानी के नायक होरी की जिंदगी संघर्षों से भरी है। वह लगातार मुश्किलों से लड़ता है, सपने देखता है और गिरकर फिर उठता है। यह उपन्यास बताता है कि जीवन की असली जीत संघर्ष करते रहने में होती है।

विंग्स ऑफ फायर (एपीजे अब्दुल कलाम)

ये भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की आत्मकथा है। इसे पढ़ेंगे तो जानेंगे कि साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। इस किताब में असफलताओं को सीख में बदलने का शानदार संदेश मिलता है।

भगवद्गीता

जब अर्जुन युद्धभूमि में निराश होकर अपने हथियार डाल देते हैं, तब श्रीकृष्ण उन्हें कर्म का महत्व समझाते हैं। गीता का सबसे बड़ा संदेश है कि इंसान को अपना कर्म करते रहना चाहिए और परिणाम की चिंता में खुद को कमजोर नहीं पड़ने देना चाहिए।

हमें याद रखना चाहिए कि मेहनत का फल हमेशा तुरंत नहीं मिलता। कई बार जिंदगी हमें ठहरकर, सीखकर और थोड़ा और मजबूत होकर आगे बढ़ने का समय देती है। ऐसे दौर में अच्छी किताबें किसी दोस्त की तरह हमारा साथ देती हैं और आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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