Childhood obesity in India: आजकल बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ती हुई हेल्थ प्रॉब्लम बनता जा रहा है। पहले यह समस्या ज्यादा तर विकसित देशों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब भारत जैसे देशों में भी इसका असर तेजी से दिख रहा है। हाल ही में जारी World Obesity Atlas 2026 की रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों में मोटापे के मामले में भारत अब अमेरिका से भी आगे निकल चुका है और दुनिया में चीन के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में बच्चों में कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
बच्चों में मोटापे के मामले में भारत दूसरे नंबर पर
नई रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों में मोटापे और ओवरवेट की संख्या के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है। इस सूची में चीन पहले नंबर पर है, जबकि अमेरिका तीसरे स्थान पर चला गया है।
रिपोर्ट बताती है कि 2025 तक भारत में लगभग 41 मिलियन (4.1 करोड़) बच्चे 5 से 19 साल की उम्र के बीच हाई BMI यानी ज्यादा वजन की समस्या से जूझ रहे थे, जिनमें से करीब 14 मिलियन बच्चे मोटापे से प्रभावित हैं। यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि भारत में बच्चों की लाइफस्टाइल तेजी से बदल रही है और इसका असर उनकी सेहत पर दिखने लगा है।
2040 तक हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं
रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो 2040 तक भारत में लगभग 20 मिलियन बच्चे मोटापे से पीड़ित हो सकते हैं। इतना ही नहीं, करीब 56 मिलियन बच्चे ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में आ सकते हैं।
यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि भविष्य की हेल्थ समस्या का संकेत भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में मोटापा बढ़ने का मतलब है कि आने वाले समय में कम उम्र में ही डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
कम उम्र में बढ़ सकता है गंभीर बीमारियों का खतरा
बचपन में मोटापा केवल वजन बढ़ने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर के कई सिस्टम को प्रभावित करता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि आने वाले वर्षों में हाई BMI के कारण बच्चों में कई हेल्थ रिस्क बढ़ सकते हैं।
अनुमान है कि 2040 तक भारत में लाखों बच्चों में हाइपरटेंशन, हाई ब्लड शुगर और हाई ट्राइग्लिसराइड्स जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। ये सभी स्थितियां आगे चलकर हार्ट डिजीज और अन्य क्रॉनिक बीमारियों का कारण बन सकती हैं। इसलिए विशेषज्ञ इसे भविष्य की बड़ी पब्लिक हेल्थ चुनौती मान रहे हैं।
तेजी से बदलती लाइफस्टाइल भी एक बड़ी वजह
रिपोर्ट में बच्चों में बढ़ते मोटापे के पीछे कई कारण बताए गए हैं। इनमें सबसे बड़ी वजह बदलती लाइफस्टाइल और शारीरिक गतिविधि की कमी मानी जा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक करीब 74% किशोर (11–17 साल) रोजाना जरूरी शारीरिक गतिविधि नहीं कर पाते। इसके अलावा जंक फूड का बढ़ता चलन, स्क्रीन टाइम में वृद्धि और बाहर खेलने की कम आदत भी इस समस्या को बढ़ा रही है। साथ ही स्कूलों में पोषणयुक्त भोजन की उपलब्धता भी सीमित है, जिससे बच्चों की डाइट बैलेंस्ड नहीं रह पाती।
अभी से कदम उठाने की जरूरत
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों में बढ़ता मोटापा केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि एक सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौती है। अगर इस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में हेल्थ सिस्टम पर भी इसका बड़ा दबाव पड़ सकता है।
इसलिए जरूरी है कि बच्चों को छोटी उम्र से ही हेल्दी डाइट, नियमित फिजिकल एक्टिविटी और संतुलित लाइफस्टाइल की आदतें सिखाई जाएं। साथ ही स्कूलों, परिवार और सरकार को मिलकर ऐसा माहौल तैयार करना होगा जहां बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिले।
