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Chausa Mango: हुमायूं के हार की निशानी है चौसा आम की कहानी, जानिए गाजीपुरी आम को क्यों मिला चौसा नाम

History Of Chausa Aam: चौसा आम की कुछ खास बातें हैं। यह आम पकने के बाद सुनहरा पीला हो जाता है। चौसा आम के गूदे में रेशे बिल्कुल नहीं होते। यह आम खूब रसीला और बेहद मीठा होता है। आम में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है। चौसा आम की इन्हीं खूबियों के कारण पूरी दुनिया में इस आम की डिमांड है।

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चौसा आम का कैसे पड़ा नाम? हुमायूं की हार और शेरशाह की जीत की पहचान है ये आम

कैसे पड़ा चौसा आम का नाम: आम का मौसम आ चुका है। बाजार स्वादिष्ट आमों से सज चुके हैं। भारत में आम की दर्जनों वैरायटी उगाई और खाई जाती है। लंगड़ा से लेकर दशहरी तक, हर आम का अपना अलग स्वाद और इतिहास है। भारतीय आमों की एक मशहूर वैरायटी है चौसा। चौसा आम को 'आमों का राजा' भी कहा जाता है। चौसा आम अपनी मिठास, रसीलेपन और अनूठी खुशबू के लिए दुनियाभर में मशहूर है। यह आम खाने में जितना स्वादिष्ट है इसके नाम का इतिहास भी उतना ही रोचक है।

हुमायूं, शेरशाह सूरी और बिहार का चौसा

बिहार में चौसा नाम की एक जगह है। उसी जगह के ऊपर इस आम का नाम चौसा पड़ा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उस जगह के नाम पर इस आम का नाम क्यों पड़ा। दरअसल 16वीं शताब्दी में बिहार के चौसा में एक बड़ी ऐतिहासिक घटना हुई थी। इस घटना के तीन पात्र हैं। एक भारतीय शासक शेरशाह सूरी, दूसरा मुगल बादशाह हुमायूं और तीसरा बिहार का चौसा। 1539 में चौसा में हुमायूं और शेरशाह की भिड़ंत हुई। घमासान युद्ध हुआ। दोनों और से ताकत दिखाई गई। बाजी मार ली शेरशाह सूरी ने। हुमायूं को हार का सामना करना पड़ा। चौसा का यह युद्ध इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख बनकर दर्ज हो गया।

हुमायूं का हार का प्रतीक है चौसा

शेरशाह सूरी आम का बड़ा शौकीन था। उसे गाजीपुर के आम खूब पसंद थे। शेरशाह सूरी का यह पसंदीदा नाम तब गाजीपुरिया आम कहलाता था। अकबर के पिता हुमायूं संग युद्धा में जीत को यादगार बनाने के लिए शेरशाह ने अपने पसंदीदा गाजीपुरिया आम का नाम बदलकर चौसा आम रख दिया। उसके बाद से गाजीपुरिया आम चौसा आम के नाम से मशहूर हो गया। यह आम हमेशा के लिए चौसा में हुमायूं की हार का प्रतीक बनकर रह गया। आगे चलकर औरंगजेब की जुबान पर भी इस चौसा आम का स्वाद खूब चढ़ा।

चौसा आम की खूबी

इस आम की कुछ खास बातें हैं। यह आम पकने के बाद सुनहरा पीला हो जाता है। चौसा आम के गूदे में रेशे बिल्कुल नहीं होते। यह आम खूब रसीला और बेहद मीठा होता है। आम में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है। चौसा आम की इन्हीं खूबियों के कारण पूरी दुनिया में इस आम की डिमांड है। चौसा आम का निर्यात मिडिल ईस्ट, यूरोप, कनाडा और अमेरिका तक होता है। इसकी मांग न केवल इसके स्वाद बल्कि इसके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण भी है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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