International Yoga Day Quotes In Sanskrit, Yoga Day Wishes, Quotes In Sanskrit: 21 जून को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day In Sanskrit) मनाया जा रहा है। योग ना सिर्फ हमें शारीरिक बल्कि मानसिक तौर पर भी खूब मजबूत बनाता है। योग को अपने जीवन में अपना हम कई तरह के रोगों का नाश भी कर सकते हैं। योग की इसी महत्ता और जरूरत के प्रति लोगों को जागरूक बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। योगा डे के इस खास मौके पर हम अपनों को योग से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। उन्हें शुभकामना संदेश भेजते हुए इस चमत्कारी योग के बारे में भी बता सकते हैं। अगर आप अपने प्रियजनों को संस्कृत (Yoga Quotes in Sanskrit) में योग दिवस की शुभकामनाएं भेजना चाहते हैं तो हम आपकी मदद कर रहे हैं। देखें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की संस्कृत विशेज (Yoga Day Sanskrit Wishes):
Yoga Day Quotes In Sanskrit
आदित्यस्य नमस्कारान्ये कुर्वन्ति दिने दिने।
आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते॥
योपाकरोत्तं प्रवरं मुनीनां पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोस्मि॥
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पुर्णमुदच्यते
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।
International Yoga Day Wishes In Sanskrit
योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय ।
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते ॥
मनःप्रशमनोपायो योग इत्यभिधीयते॥
अर्थ: मन को शांत करने का उपाय योग कहलाता है।
International Yoga Day Quotes In Sanskrit
व्यायामात् लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखं। आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम् ||
योगेन चित्तस्य पदेन वाचां मलं शरीरस्य च वैदिकेन ।
योपाकरोत्तं प्रवरं मुनीनां पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोस्मि॥
Yoga Day Quotes In Sanskrit
सर्वतीर्थमयी माता सर्वदेवमयः पितामातरं पितरं तस्मात् सर्वयत्नेन पूजयेत्
शरीरोपचयः कान्तिर्गात्राणां सुविभक्तता । दीप्ताग्नित्वमनालस्यं स्थिरत्वं लाघवं मृजा ॥
International Yoga Day Quotes In Sanskrit
श्रमक्लमपिपासोष्णशीतादीनां सहिष्णुता । आरोग्यं चापि परमं व्यायामदुपजायते ॥
यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधय: अष्टौ अङ्गानि।
Happy International Yoga Day Quotes In Sanskrit
तत्र स्थितो योगी ब्रह्म निर्वाणमृच्छति।अर्थ: योगी योग में स्थित होकर ब्रह्म निर्वाण को प्राप्त करता है।
योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय । सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते ॥
