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बेटियों की परवरिश में जरूर रखें इन 8 बातों का ध्यान, सशक्त बन खूब नाम कमाएगी बिटिया

सबसे जरूरी बात ये है कि उसे असफलता से डील करना सिखाएं। उसे बताएं कि हमेशा वैसा ही नहीं होगा जैसा वो चाहेगी। कई बार हार मिलेगी। कई बार हौसला टूटेगा। उसे सिखाएं कि कैसे असफलता को अपना हथियार बनाकर फिर से उठ खड़े होना है।

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बेटियों की अच्छी परवरिश के Parenting Tips (Photo: iStock)

तेजी से बदलते आज के समाज में बेटियों की परवरिश ऐसी होनी चाहिए कि वह किसी भी परिस्थिति का सामना पूरे दम से कर सकें। आज उन्हें सिर्फ लाड़ प्यार ही नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मरक्षा के गुर भी चाहिए। ऐसे मां पेरेंट्स की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह अपनी बच्ची को ऐसी परवरिश दें कि वह आर्थिक और भावनात्मक तौर पर सशक्त हो सके। यहां हम कुछ टिप्स दे रहे हैं जिससे आप अपनी गुड़िया को जीवन की हर चुनौती से लड़ने के लिए तैयार कर सकेंगे।

कॉन्फिडेंस सिखाएं

कच्ची उम्र से ही बेटियों को सिखाएं कि वह पूरे आत्मविश्वास के साथ सवाल करें। खुल कर बोलें और अपने फैसले खुद लें। ये कॉन्फिडेंस ही आगे तलकर उनका सबसे बड़ा साथी बनेगा।

करियर ओरिएंटेड एजुकेशन दें

बेटियों को सिर्फ पढ़ाएं नहीं। उन्हें कौशल भी सिखाएं। उन्हें ऐसे कोर्स कराएं जो आगे चलकर उन्हें आत्मनिर्भर बना सके। उन्हें समझाएं कि शिक्षा उनका सबसे बड़ा हथियार है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता की सीख

हर पेरेंट्स को चाहिए कि वह अपनी बेटियों को मनी मैनेजमेंट सिखाए। उन्हें पैसों का महत्व बताएं। पॉकेट मनी से सेविंग तक को अच्छे से इस्तेमाल करना सिखाएं। य आदतें उसे आर्थिक तौर पर सशक्त बनाएंगी।

ना कहना सिखाएं

बेटियों को ना कहना जरूर सिखाएं। यह आदत उन्हें किसी भी गलत परिस्थिति में समझौता न करना गलत फैसलों से बचाएगा।

आत्मरक्षा सिखाएं

बेटियों को आत्मरक्षा जरूर सिखाएं। उन्हें सेल्फ डिफेंस के लिए कराटे या कोर्ट मार्शल जैसी ट्रेनिंग दिलाएं। शारीरिक मजबूती के साथ मानसिक तौर पर भी उन्हें मजबूत बनाएं।

बराबरी समझाएं

बच्चियों तो समझाएं कि वह किसी भी मामले में लड़कों से कम नहीं हैं। आप अपने व्यवहार से भी उन्हें ये सिखाएं कि लड़के-लड़की सब बराबर होते हैं।

खुद फैसला लेना सिखाएं

माता-पिता बच्चियों को अपने फैसले खुद लेना सिखाएं। भले वह गलत फैसला लें लेकिन उन्हें प्रोत्साहित करें। कपड़े चुनने से लेकर दोस्त बनाने तक, उन्हें अपने निर्णय खुद लेने दें। आपको कुछ गलत लगे तो उसे समझाएं। अपना फैसला थोपें ना।

असफलता से न डरना

सबसे जरूरी बात ये है कि उसे असफलता से डील करना सिखाएं। उसे बताएं कि हमेशा वैसा ही नहीं होगा जैसा वो चाहेगी। कई बार हार मिलेगी। कई बार हौसला टूटेगा। उसे सिखाएं कि कैसे असफलता को अपना हथियार बनाकर फिर से उठ खड़े होना है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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