Faiz Ahmad Faiz Shayari in Hindi: फैज अहमद फैज उर्दू साहित्य के महान शायर, लेखक और बुद्धिजीवी थे। उन्हें आधुनिक उर्दू शायरी में क्रांतिकारी बदलाव लाने का श्रेय दिया जाता है। 13 फरवरी 1911 को पंजाब (अब पाकिस्तान) के सियालकोट में जन्मे फैज ने अपनी शायरी में प्रेम, सामाजिक अन्याय, और मानवीय भावनाओं को गहरी संवेदनशीलता के साथ पिरोया। उनकी रचनाएं न केवल साहित्यिक बल्कि सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों का भी हिस्सा बनीं। उनकी शायरी में मजदूरों, किसानों और शोषित वर्गों की आवाज़ प्रमुखता से उभरी। साथ ही उनकी शायरी में प्रेम और क्रांति का अनूठा मेल देखने को मिलता है। उनकी शायरी, जैसे 'हम देखेंगे' और 'मुझ से पहली सी मोहब्बत' आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं। आइए पढ़ते हैं फैज अहमद फैज की कलम से निकले चंद मशहूर शेर:
Faiz ahmed faiz sher | faiz ahmad faiz poetry
1. फिर नज़र में फूल महके दिल में फिर शमाएं जलीं
फिर तसव्वुर ने लिया उस बज़्म में जाने का नाम
2. दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के
3. वो बात सारे फ़साने में जिस का ज़िक्र न था
वो बात उन को बहुत ना-गवार गुज़री है
4. गर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है जो चाहो लगा दो डर कैसा
गर जीत गए तो क्या कहना हारे भी तो बाज़ी मात नहीं
faiz ahmad faiz poems | faiz ahmad faiz quotes
5. और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
6. जो दिल से कहा है जो दिल से सुना है
सब उन को सुनाने के दिन आ रहे हैं
7. और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
8. उठ कर तो आ गए हैं तिरी बज़्म से मगर
कुछ दिल ही जानता है कि किस दिल से आए हैं
9. इक गुल के मुरझाने पर क्या गुलशन में कोहराम मचा
इक चेहरा कुम्हला जाने से कितने दिल नाशाद हुए
faiz ahmad faiz best shayari
10. दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
11. आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
इस के बाद आए जो अज़ाब आए
12. और क्या देखने को बाक़ी है
आप से दिल लगा के देख लिया
13. दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की शायरी | फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के शेर
14. तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं
15. उतरे थे कभी 'फ़ैज़' वो आईना-ए-दिल में
आलम है वही आज भी हैरानी-ए-दिल का
16. वो बात सारे फ़साने में जिस का ज़िक्र न था
वो बात उन को बहुत ना-गवार गुज़री है
17. दिल से तो हर मोआ'मला कर के चले थे साफ़ हम
कहने में उन के सामने बात बदल बदल गई
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ग़ज़ल | फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के मशहूर शेर
18. कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बे-हिसाब आए
19. आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
इस के बा'द आए जो अज़ाब आए
20. वीरां है मय-कदा ख़ुम-ओ-साग़र उदास हैं
तुम क्या गए कि रूठ गए दिन बहार के
21. अब जो कोई पूछे भी तो उस से क्या शरह-ए-हालात करें
दिल ठहरे तो दर्द सुनाएँ दर्द थमे तो बात करें
बता दें कि फैज को अपने क्रांतिकारी विचारों के कारण कई बार जेल में डाल दिया गया, लेकिन उनकी लेखनी कभी रुकी नहीं। उन्हें 1962 में लेनिन शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। फैज की विरासत उर्दू साहित्य और सामाजिक चेतना में अमर है।
