भारत सरकार ने कुछ विदेशी नागरिकों के लिए पासपोर्ट और वीजा से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। इन बदलावों का फायदा पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए कुछ लोगों के साथ-साथ श्रीलंकाई तमिलों और तिब्बती नागरिकों को भी मिल सकता है। खास बात यह है कि कुछ लोगों को अब पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के रिन्यूअल (Renewal) से जुड़ी शर्तों में राहत दी गई है।
भारत में लागू हुआ नया पासपोर्ट-वीजा नियम (सांकेतिक तस्वीर)
गृह मंत्रालय ने 5 नवंबर 2026 को आव्रजन और विदेशी (छूट) (संशोधन) आदेश, 2026 (Immigration and Foreigners Exemption Amendment Order, 2026) पब्लिश किया है। इसका मकसद कुछ खास परिस्थितियों में भारत में रह रहे लोगों को राहत देना है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी लोगों को अपने आप भारतीय नागरिकता या स्थायी रूप से रहने का अधिकार मिल गया है। कई मामलों में भारत में रहने के लिए उचित वीजा लेना अब भी जरूरी होगा।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि सरकार ने किन लोगों के लिए नियम बदले हैं और इसका क्या मतलब है।
पाकिस्तानी नागरिकों के लिए क्या बदला?
नए नियमों के तहत पाकिस्तान के कुछ ऐसे नागरिकों को राहत दी गई है, जो 31 दिसंबर 2009 तक भारत आ चुके थे और यहीं स्थायी रूप से बसना चाहते हैं। दरअसल, कुछ लोगों के पास पाकिस्तान का कंप्यूटरीकृत राष्ट्रीय पहचान पत्र (CNIC) नहीं है। इस वजह से वे अपने पाकिस्तानी पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों का रिन्यूअल (Renewal) नहीं करवा पा रहे थे। नए प्रावधान के तहत पात्र लोगों को पासपोर्ट रिन्यूअल (Renewal) की सामान्य शर्तों से छूट मिल सकती है लेकिन यह राहत सभी पाकिस्तानी नागरिकों के लिए नहीं है। इसके लिए कुछ शर्तें भी रखी गई हैं।
क्या हैं शर्तें
- संबंधित व्यक्ति 31 दिसंबर 2009 तक भारत आ चुका हो।
- उसने पाकिस्तान में रहते हुए शादी न की हो।
- उसके नाम पाकिस्तान में कोई अचल संपत्ति न हो।
- पाकिस्तान की यात्रा के दौरान उसके भारतीय नागरिक परिवार के सदस्य भारत में ही रह गए हों।
- उसे यह लिखित आश्वासन देना होगा कि वह दोबारा पाकिस्तान नहीं लौटेगा।
- उसके खिलाफ पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों का कोई गलत गतिविधियों से जुड़ा रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए।
इसका आसान मतलब
अगर कोई पात्र पाकिस्तानी नागरिक लंबे समय से भारत में रह रहा है और पहचान पत्र की कमी के कारण अपने यात्रा दस्तावेजों का रिन्यूअल (Renewal) नहीं करवा पा रहा है, तो उसे कुछ शर्तों के साथ राहत मिल सकती है।
सांकेतिक तस्वीर (AI Generated Image)
अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को राहत
नए नियमों में तीन पड़ोसी देशों से आए छह अल्पसंख्यक समुदायों को भी शामिल किया गया है। ये समुदाय हैं:
- हिंदू
- सिख
- बौद्ध
- जैन
- पारसी
- ईसाई
यह राहत उन लोगों के लिए है, जो धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने या ऐसे उत्पीड़न का डर होने के कारण अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान से भारत आए थे। इसमें वे लोग शामिल हैं, जो 31 दिसंबर 2024 तक भारत में प्रवेश कर चुके थे। उन्हें पासपोर्ट या दूसरे जरूरी यात्रा दस्तावेजों से जुड़ी कुछ शर्तों में छूट दी गई है। इसका फायदा उन लोगों को भी मिल सकता है, जो बिना वैलिड पासपोर्ट या जरूरी यात्रा डॉक्यूमेंट्स के भारत आए थे या जिनके दस्तावेज बाद में समाप्त हो गए।
क्या उन्हें भारत में हमेशा रहने की अनुमति मिल गई है?
यह बात समझना बहुत जरूरी है। पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों से जुड़ी छूट का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को अपने आप भारत में स्थायी रूप से रहने का अधिकार मिल गया है। भारत में रहने की अवधि जारी रखने के लिए उसे नियमों के अनुसार उचित वीजा लेना होगा।
श्रीलंकाई तमिलों के लिए क्या है नया नियम?
भारत में लंबे समय से श्रीलंका के तमिल नागरिक शरण लेते रहे हैं। नए संशोधन में इस समुदाय के कुछ लोगों को भी राहत दी गई है। इसके तहत वे पंजीकृत श्रीलंकाई तमिल नागरिक शामिल हैं, जिन्होंने 9 जनवरी 2015 तक भारत में शरण मांगी थी। ऐसे लोगों को सामान्य पासपोर्ट और वीजा आवश्यकताओं से छूट दी गई है। इसका मतलब है कि पात्र लोगों को अपने दस्तावेजों से जुड़ी कुछ मुश्किलों से राहत मिल सकती है। यह प्रावधान खास तौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से भारत में रह रहे हैं और अपने यात्रा दस्तावेजों को लेकर परेशानी का सामना कर रहे हैं।
नए आदेश में भारत, नेपाल और भूटान के नागरिकों के एक-दूसरे के देशों में आने-जाने के नियमों को भी स्पष्ट किया गया है। (AI Generated Image)
तिब्बती नागरिकों को भी मिलेगी राहत
नए नियमों में कुछ तिब्बती नागरिकों को भी शामिल किया गया है। इनमें वे लोग आते हैं, जो 1959 से 30 मई 2003 के बीच काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास की ओर से जारी अनुमति पत्र के आधार पर भारत आए थे। इसके अलावा, 30 मई 2003 के बाद भारत-नेपाल सीमा के रास्ते विशेष प्रवेश अनुमति लेकर भारत आने वाले कुछ तिब्बती नागरिकों को भी इस छूट का लाभ मिल सकता है। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों को राहत देना है, जिनका भारत में प्रवेश पहले से तय विशेष प्रक्रियाओं के तहत हुआ था।
क्या नेपाली और भूटानी नागरिकों के नियम भी बदले हैं?
आपके दिए गए विवरण के मुताबिक, नेपाली और भूटानी नागरिकों के लिए अलग यात्रा छूट जारी है। इसका मतलब है कि उनके लिए लागू विशेष यात्रा व्यवस्था को इन नए संशोधनों से अलग समझना चाहिए।
आखिर इन बदलावों का आम मतलब क्या है?
इन नए नियमों को समझने के लिए तीन बातें याद रखना जरूरी है:
1. पासपोर्ट से राहत: कुछ पात्र लोगों को पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के नवीनीकरण की सामान्य शर्तों से छूट मिल सकती है।
2. हर किसी को फायदा नहीं: यह राहत सिर्फ तय तारीखों और शर्तों के तहत आने वाले लोगों के लिए है।
3. वीजा अब भी जरूरी हो सकता है: पासपोर्ट नियमों में छूट मिलने का मतलब भारत में हमेशा रहने की अनुमति मिलना नहीं है। कई लोगों को अपना वीजा और दूसरी आव्रजन औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
कुल मिलाकर, सरकार का यह संशोधन उन खास समूहों के लिए राहत लेकर आया है, जिन्हें अपने यात्रा दस्तावेजों के नवीनीकरण या कानूनी स्थिति से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि, किस व्यक्ति को कितनी राहत मिलेगी, यह उसकी स्थिति और नए आदेश में तय शर्तों पर निर्भर करेगा।
नए आदेश में कुछ और महत्वपूर्ण बातें
सरकारी गजट की जांच करने पर कुछ अतिरिक्त प्रावधान भी सामने आते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है।
केरल में रहने वाले कुछ भारतीय मूल के मुस्लिम नागरिक
नए आदेश में उन पुरुषों के लिए भी विशेष छूट है, जो मूल रूप से भारतीय नागरिक थे और विभाजन के बाद 15 अगस्त 1947 से 31 दिसंबर 1965 के बीच पाकिस्तान चले गए थे। वे अपने परिवार को भारत में छोड़कर गए थे और 31 दिसंबर 2009 तक पाकिस्तान का पासपोर्ट लेकर केरल लौट आए थे।
इस छूट के लिए कुछ शर्तें हैं:
- उन्होंने पाकिस्तान में रहते हुए शादी नहीं की हो।
- पाकिस्तान में कोई अचल संपत्ति न खरीदी हो।
- भारत में उनके परिवार के सदस्य भारतीय नागरिक हों।
- वे दोबारा पाकिस्तान न लौटने का वादा करें।
- उनके खिलाफ पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों की कोई प्रतिकूल रिपोर्ट न हो।
ये शर्तें भारत लौटे इस विशेष समूह के लिए हैं, न कि उन सभी पाकिस्तानी नागरिकों के लिए जिन्हें CNIC नहीं होने के कारण पासपोर्ट नवीनीकरण में परेशानी है।
केरल में रहने वाले कुछ भारतीय मूल के मुस्लिम नागरिकों के लिए भी कुछ सुधार है (AI Generated Images)
मलेशिया और सिंगापुर की नागरिकता लेने वाले भारतीय मूल के लोग
ऐसे कुछ लोग भी इस आदेश में शामिल हैं, जो भारतीय मूल के हैं और बाद में मलेशिया या सिंगापुर के नागरिक बन गए। वे 31 दिसंबर 2009 तक भारत लौट आए थे, लेकिन उनके पासपोर्ट की अवधि समाप्त हो गई और संबंधित देश उसे नवीनीकृत नहीं कर रहे हैं। ऐसे लोगों को भी भारत में रहने के लिए वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज की शर्त से छूट मिल सकती है। हालांकि, उन्हें भारत में अपना प्रवास जारी रखने के लिए उचित श्रेणी का वीजा लेना होगा।
नेपाल और भूटान के नागरिकों के लिए यात्रा नियम
नए आदेश में भारत, नेपाल और भूटान के नागरिकों के एक-दूसरे के देशों में आने-जाने के नियमों को भी स्पष्ट किया गया है। इन देशों के नागरिकों को सीधे जमीन या हवाई मार्ग से यात्रा करते समय पासपोर्ट की जगह वीजा मैनुअल में बताए गए पहचान दस्तावेज दिखाने की छूट है लेकिन अगर नेपाली या भूटानी नागरिक चीन, मकाऊ, हांगकांग या पाकिस्तान से होकर भारत आते हैं, तो उन्हें वैध पासपोर्ट और वीजा रखना होगा। इसी तरह, भारत के नागरिकों को नेपाल या भूटान के रास्ते किसी तीसरे देश से आने-जाने पर सामान्य पासपोर्ट नियमों का पालन करना होगा।
एक जरूरी कानूनी अंतर
श्रीलंकाई तमिलों के लिए आदेश में पंजीकृत होने और 9 जनवरी 2015 तक भारत में शरण लेने की शर्त है। उन्हें प्रवेश, रहने और बाहर जाने के लिए पासपोर्ट तथा वीजा की सामान्य जरूरत से छूट दी गई है। तिब्बतियों के लिए भी तय प्रवेश अनुमति और पंजीकरण की शर्तों के साथ पासपोर्ट और वीजा से छूट है।
