Red Planet Moon Mission: अनंत ब्रह्मांड में असंख्य रहस्य छिपे हुए हैं। ऐसे में खगोलविद और विज्ञानी ब्रह्मांड की गहराइयों में छिपे रहस्यों को देखने की लगातार कोशिश करते रहते हैं, लेकिन अभी तक समुद्र में मौजूद एक रेतीले कण जितना ही जान पाए हैं। हालांकि, असंख्य आकाशगंगाओं में से एक हमारी मिल्की वे में मौजूद अनंत ग्रहों में से मंगल ग्रह खगोलविदों को सबसे ज्यादा रोमांचित करता है। तभी तो एक के बाद एक अंतरिक्ष एजेंसियां उससे जुड़ा मिशन लॉन्च करती रहती हैं।
मंगल ग्रह पर कभी मनुष्यों को बसाने की बात कही जाती है तो कभी मंगल के चंद्रमाओं की मिट्टी को पृथ्वी पर लाने के लिए मिशन लॉन्च किए जाते हैं। इसी कड़ी में आज बात उस खास मिशन की करेंगे, जिसे जापान की अंतरिक्ष एजेंसी ने लॉन्च किया है।
क्या है जापान का MMX मिशन?
जापान की अंतरिक्ष एजेंसी ने मंगल ग्रह के चंद्रमाओं की जांच करने और वहां से मिट्टी के नमूने धरती पर लाने के लिए एक खास मिशन शुरू किया है। इस मिशन का नाम मार्सियन मून्स एक्सप्लोरेशन (MMX) है। इसे जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA ने तैयार किया है। इस अभियान में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA), यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और कई अन्य एजेंसियों ने भी सहयोग किया है।
फोबोस पर लैंड करेगा रोवर
इस मिशन के तहत अंतरिक्ष यान मंगल के दोनों चंद्रमाओं फोबोस और डीमोस का करीब से अध्ययन करेगा। इसके बाद यह मंगल के सबसे बड़े चंद्रमा फोबोस की सतह पर उतरने की कोशिश करेगा। वहां से चट्टानों और मिट्टी के नमूने इकट्ठा किए जाएंगे। इसके बाद, नमूनों को करीब पांच साल बाद धरती पर वापस लाया जाएगा।
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस मिशन से मंगल के चंद्रमाओं की उत्पत्ति से जुड़ी दशकों पुरानी गुत्थी सुलझ सकती है। साथ ही, इससे मंगल ग्रह के पुराने इतिहास और सौरमंडल के शुरुआती दौर से जुड़ी अहम जानकारियां भी मिल सकती हैं। पेरिस ऑब्जर्वेटरी की खगोल वैज्ञानिक सोनिया फोर्नासियर के मुताबिक, यह मिशन मंगल और उसके चंद्रमाओं को समझने की हमारी क्षमता में बड़ा बदलाव ला सकता है।
मंगल के करीब कब पहुंचेगा अंतरिक्ष यान?
जापान ने तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से एच3 रॉकेट के जरिए इस मिशन को लॉन्च किया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, करीब 22.5 करोड़ किलोमीटर का सफर तय करके अगस्त 2027 तक अंतरिक्ष यान के मंगल ग्रह के करीब पहुंचने की संभावना है। वहां पहुंचने के बाद अंतरिक्ष यान मंगल के चंद्रमा फोबोस के आसपास रहकर उसका अध्ययन करेगा।
कुछ महीनों तक फोबोस का उसके आस-पास से अध्ययन करने के बाद अंतरिक्ष यान वहां की सतह पर उतरने की कोशिश करेगा। इस दौरान, एक छोटा रोवर चंद्रमा की सतह पर उतरेगा और उसकी जांच करेगा और ऐसी जगह तलाशेगा, जहां से अंतरिक्ष यान मिट्टी के नमूने आसानी से इकट्ठा कर सके।
Mars Moon Mission
इस रोवर का नाम आइडफिक्स (IDEFIX) है। इसे फ्रांस और जर्मनी की अंतरिक्ष एजेंसियों ने मिलकर तैयार किया है। रोवर के शुरुआती अध्ययन के बाद, MMX अंतरिक्ष यान फोबोस की सतह पर उतरने की कोशिश करेगा। इसके लैंडर में चार पैर होंगे। इनमें से दो पैरों में मिट्टी और चट्टानों के नमूने इकट्ठा करने के लिए खास उपकरण लगाए गए हैं।
जापान की योजना फोबोस से करीब 10 ग्राम मिट्टी और चट्टानों के नमूने इकट्ठा करने की है। इन नमूनों को एक खास कैप्सूल में सुरक्षित रखा जाएगा। इसके बाद अंतरिक्ष यान मंगल के दूसरे चंद्रमा डीमोस के पास से भी गुजरेगा और उससे जुड़ी जानकारियां जुटाएगा।
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कब हुई थी मंगल के चंद्रमाओं की खोज?
मंगल ग्रह के दो चंद्रमा हैं- फोबोस और डीमोस। इनकी खोज अमेरिकी खगोल वैज्ञानिक आसफ हॉल ने 1877 में की थी। ये दोनों धरती के चंद्रमा की तुलना में बहुत छोटे हैं। फोबोस का आकार करीब 22 किलोमीटर और डीमोस का आकार करीब 12 किलोमीटर है। इन दोनों चंद्रमाओं की बनावट भी गोल नहीं, बल्कि कुछ टेढ़ी-मेढ़ी है। इनमें सबसे बड़ा फोबोस मंगल ग्रह के काफी करीब है।
खगोलविदों के मुताबिक, चंद्रमा धीरे-धीरे मंगल की ओर बढ़ रहा है। भविष्य में मंगल के गुरुत्वाकर्षण के कारण इसके टूटने की आशंका भी जताई जाती रही है। हालांकि, खगोलविदों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये दोनों चंद्रमा कैसे बने? और जापान का यह मिशन इसी रहस्य को सुलझाने में अहम भूमिका अदा कर सकता है।
