बहुत से लोग कई बार अपने कामकाज में इतना उलझ जाते हैं कि उनके लिए अपने ही परिवार के लिए समय निकालना चुनौती बन जाता है। ऐसे समय में एक्ट्रेस और सांसद हेमा मालिनी ने अपने दिवंगत पति धर्मेंद्र की एक ऐसी सीख शेयर की, जो हर किसी के लिए प्रेरणा बन सकती है। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र ने अपने आखिरी समय में उनसे कहा था कि परिवार के साथ रहो, बच्चों के साथ समय बिताओ और परिवार को एकजुट रखो। उनके अनुसार काम तो चलता रहेगा, लेकिन परिवार को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है।
हर किसी के लिए क्यों जरूरी है यह बात?
आज पहले की तुलना में परिवार एक साथ कम समय बिता पा रहे हैं। नौकरी, पढ़ाई और अलग-अलग शहरों में रहने की वजह से रिश्तों में दूरी बढ़ना आम बात हो गई है। ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि परिवार के साथ बिताया गया समय केवल भावनात्मक जुड़ाव ही नहीं बढ़ाता, मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर डालता है।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जिन परिवारों में लोग नियमित रूप से बातचीत करते हैं, साथ बैठकर भोजन करते हैं या सप्ताह में कुछ समय केवल एक-दूसरे के लिए निकालते हैं, वहां आपसी विश्वास और भावनात्मक सुरक्षा अधिक मजबूत होती है।
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साथ रहने का मतलब सिर्फ एक घर में रहना नहीं
हेमा मालिनी ने यह भी बताया था कि धर्मेंद्र का मानना था कि बच्चों और परिवार के साथ समय बिताना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उनका संदेश केवल एक छत के नीचे रहने तक सीमित नहीं था, भावनात्मक रूप से जुड़े रहने का था।
विशेषज्ञ भी कहते हैं कि परिवार के बीच मौजूदगी का मतलब केवल शारीरिक रूप से साथ होना नहीं है। अगर हर सदस्य अपने-अपने मोबाइल या काम में व्यस्त रहे, तो साथ रहने का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। रिश्ते मजबूत करने के लिए संवाद, एक-दूसरे की बातें सुनना और साझा अनुभव बनाना जरूरी है।
बच्चों पर पड़ता है गहरा असर
परिवार के साथ समय बिताने का सबसे बड़ा फायदा बच्चों को मिलता है। जब माता-पिता उनके साथ खुलकर बात करते हैं, उनकी भावनाओं को समझते हैं और रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल रहते हैं, तो बच्चों में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना विकसित होती है। साथ ही, वे रिश्तों की अहमियत भी व्यवहार से सीखते हैं, केवल उपदेशों से नहीं।
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व्यस्त जिंदगी में कैसे निकालें परिवार के लिए समय?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि परिवार के साथ जुड़ने के लिए बड़े बदलाव जरूरी नहीं हैं। छोटी-छोटी आदतें भी बड़ा अंतर ला सकती हैं:
- दिन में कम से कम एक बार साथ बैठकर भोजन करें।
- सप्ताह में एक दिन 'नो-वर्क, नो-फोन' फैमिली टाइम रखें।
- बच्चों और बुजुर्गों से रोज कुछ मिनट खुलकर बातचीत करें।
- छोटे-छोटे पारिवारिक समारोह और मिलना-जुलना जारी रखें।
परिवार ही सबसे बड़ी पूंजी
धर्मेंद्र की ये बातें केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। यह हर उस व्यक्ति के लिए मायने रखती है, जो सफलता की दौड़ में अपनों के लिए समय निकालना भूल जाता है। करियर, पैसा और उपलब्धियां जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन मुश्किल समय में सबसे पहले साथ खड़ा होने वाला परिवार ही होता है।
