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बच्चों को घर का बना सेरेलक भी देना चाहिए या नहीं, बच्चों की डॉक्टर ने बताया

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  • Updated Jun 3, 2026, 02:42 PM IST

इंफ्लूएंजर/डॉक्टर माधवी भारद्वाज ने अपनी एक हालिया वीडियो में शेयर किया कि, बच्चों को सेरेलक देना चाहिए या नहीं। अगर आप छोटे बच्चे के पेरेंट्स हैं, जो जरूर जानिए की सेरेलक बच्चों की डाइट में होना चाहिया या नहीं।

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Bacchon ko cerelac dena chahiye ya nahi

जब बच्चा छह महीने का होने लगता है, तो पेरेंट्स उसको सॉलिड फूड देने की शुरुआत करने की तैयारी करते हैं। इस दौरान घर का बना सेरेलक इन दिनों काफी वायरल माना जा है। कई लोग चावल, दाल, ड्राई फ्रूट्स, बीज और दूसरी पौष्टिक चीजों को मिलाकर सेरेलक घर पर ही तैयार करते हैं और इसे बच्चे के लिए हेल्दी मानते हैं। लेकिन क्या बच्चों को सेरेलक देना सही है? इस विषय पर बच्चों की डॉक्टर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर माधवी भारद्वाज ने एक खास वीडियो शेयर किया है।

डॉक्टर के अनुसार, बाजार वाला सेरेलक तो बच्चों के लिए बहुत अच्छा नहीं ही माना जाता है। लेकिन घर वाला सेरेलक भी रोज देने के लिए अच्छा ऑप्शन नहीं है। अब समस्या घर के बने सेरेलक में नहीं, बल्कि उसमें एक साथ बहुत सारी चीजें मिलाने में हो सकती है। अक्सर माता-पिता सोचते हैं कि जितने ज्यादा पोषक तत्व एक कटोरी में डाल देंगे, बच्चा उतना ही स्वस्थ बनेगा। लेकिन छोटे बच्चों का पाचन तंत्र अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता और वह हर चीज को एक साथ पचाने के लिए तैयार नहीं होता।

एक साथ ज्यादा चीजें मिलाना पड़ सकता है भारी

डॉक्टर का कहना है कि जब सेरेलक में दाल, कई तरह के नट्स, बीज और अन्य सामग्री एक साथ मिला दी जाती है, तो बच्चे के शरीर को कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट एक साथ पचाने में कठिनाई हो सकती है। इससे पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

क्या हो सकती हैं समस्याएं?

अगर बच्चे का पेट इन सभी चीजों को सही तरीके से पचा नहीं पाता, तो दस्त, कब्ज और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ बच्चों में गैस बनने और कोलिक यानी पेट में ऐंठन की शिकायत भी देखने को मिल सकती है। ऐसे में बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है और ठीक से दूध या खाना भी नहीं खा पाता।

क्या करें माता-पिता?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चे को नई चीजें धीरे-धीरे और एक-एक करके खिलानी चाहिए। इससे यह समझने में आसानी होती है कि कौन-सी चीज उसके शरीर को सूट कर रही है और कौन-सी नहीं। शुरुआती दिनों में साधारण और आसानी से पचने वाली चीजों को ही प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है। हालांकि हर बच्चे का बॉडी टाइप अलग होता है। इसलिए अपने बच्चे और डॉक्टर की सलाह अनुसार ही डाइट दें।

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