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'हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा...'; ओजस्वी वक्ता, मिलनसार नेता अटल बिहारी वाजपेयी के शब्द आज भी दिखा रहे रास्ता

Atal Bihari Vajpayee Motivational Quotes: भारतीय राजनीति और साहित्य जगत के लिए 25 दिसंबर यानि आज का दिन बेहद खास है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और संवेदनशील कवि अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म आज ही के दिन हुआ था। अटल बिहारी वाजपेयी भले आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनके अनमोल वचन आज लाखों युवाओं में एक नया जोश भर देते हैं। आज हम आपको अटल बिहारी वाजपेयी के 10 मोटिवेशनल कोट्स बताने जा रहे हैं।

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अटल बिहारी वाजपेयी के प्रेरक विचार और कविताएं

Atal Bihari Vajpayee Motivational Quotes: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म आज ही के दिन यानि 25 दिसंबर को हुआ था। अटल बिहारी वाजपेयी अपने शानदार विचारों से लोगों के दिलों में आज भी जिंदा हैं। अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान देश को हमेशा याद रहेगा। इसके साथ ही उनकी कही हुई बातें भी आज तक लाखों युवाओं के दिल में जोश भर देती हैं। देश के करोड़ों युवा आज भी उनके जीवन से प्रेरणा लेते हैं। आज हम आपको अटल बिहारी वाजपेयी के 10 मोटिवेशनल कोट्स बताने जा रहे हैं जो आपके जीवन में एक नई राह दिखाने का काम कर सकते हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी के मोटिवेशनल कोट्स - Motivational Quotes by Atal Bihari Vajpayee

1- नेतृत्व वही है जो संकट में भी संयम न खोए।

2- छोटी-छोटी बातें मन को छोटा बनाती हैं, बड़े लक्ष्य मन को बड़ा करते हैं।

3- हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा।

4- विचारों की असहमति दुश्मनी नहीं होनी चाहिए।

5- दांव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते।

टूट सकते हैं, मगर हम झुक नहीं सकते।

अटल बिहारी वाजपेयी कविता - Atal Bihari Vajpayee Poems In Hindi

1- बाधाएं आती हैं आएं,

घिरें प्रलय की घोर घटाएं,

पावों के नीचे अंगारे,

सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,

निज हाथों में हंसते-हंसते,

आग लगाकर जलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा।

2- गीत नया गाता हूं

टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर

पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर

झड़े सब पीले पात, कोयल की कुहुक रात

प्राची मे अरुणिम की रेख देख पता हूं

गीत नया गाता हूं।

टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी

अन्तर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी

हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूँगा,

काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं

गीत नया गाता हूं, गीत नया गाता हूं।।

3-आओ फिर से दिया जलाएं, आओ फिर से दिया जलाएं

भरी दुपहरी में अंधियारा, सूरज परछाई से हारा

अंतरतम का नेह निचोड़ें बुझी हुई बाती सुलगाएं।

आओ फिर से दिया जलाएं

हम पड़ाव को समझे मंजिल, लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल

वतर्मान के मोहजाल में आने वाला कल न भुलाएं।

आओ फिर से दिया जलाएं।

आहुति बाकी यज्ञ अधूरा, अपनों के विघ्नों ने घेरा

अंतिम जय का वज़्र बनाने नव दधीचि हड्डियां गलाएं।

आओ फिर से दिया जलाएं।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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