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Aaj ka Suvichar: लूडो के गेम से सीखो ये बड़ा सबक, 6 आए या 1- जीवन में चलना तो पड़ता ही है

Aaj ka Suvichar (Good Thought for Today): लूडो का गेम तो बहुत खेला होगा, लेकिन इसके पीछे का संदेश कभी समझा क्या? चुपके से इस खेल ने हमको बताया है कि जीवन हमेशा चलने का नाम है। उम्मीद पूरी हो तो बढ़िया। ना हो तो भी अगली उम्मीद के सहारे धीरे धीरे ही सही लेकिन आगे बढ़ा जाता है। क्यों जो इंसान हर हाल में चलता रहता है, वही अंत में मंजिल तक पहुंचता है।

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क्या सिखाते हैं लूडो के पासे

Aaj ka Suvichar (Good Thought for Today): जिंदगी अक्सर हमें बड़े-बड़े सपने दिखाती है। हम चाहते हैं कि हर बार पासा फेंकें और सीधा छह आए यानी जीवन में तुरंत तरक्की, तुरंत सफलता की उम्मीद। लेकिन सच यही है कि हर बार छह नंबर नहीं आता। कई बार एक आता है, कभी दो, कभी तीन। और वहीं से असली खेल शुरू होता है। लूडो हमें सिखाता है कि खेल छोड़ना विकल्प नहीं होता, चाल चलनी ही पड़ती है।

सोचिए, अगर लूडो में खिलाड़ी यह तय कर ले कि छह आए बिना वह गोटी नहीं चलाएगा, तो खेल वहीं खत्म हो जाएगा। जिंदगी में भी यही होता है। जो लोग कहते हैं कि जब सही मौका आएगा तब शुरू करेंगे, अक्सर वे शुरुआत ही नहीं कर पाते। जबकि समझदार खिलाड़ी वह होता है जो एक मिलने पर भी गोटी आगे बढ़ाता है, क्योंकि उसे पता है कि हर छोटी चाल आगे के बड़े मौकों की तैयारी होती है।

एक छात्र को ही देख लीजिए। वह चाहता है कि पहली ही कोशिश में टॉप रैंक आ जाए। लेकिन अगर किसी परीक्षा में औसत नंबर आ जाएं, तो क्या पढ़ाई छोड़ दे? नहीं। वही नंबर उसे यह समझाते हैं कि कहां मेहनत और करनी है। यही एक आगे चलकर छह बनने की वजह बनता है।

ऑफिस में काम करने वाला व्यक्ति प्रमोशन की उम्मीद करता है। पर कई बार सिर्फ तारीफ मिलती है, पद नहीं। यह तारीफ ही उसकी एक चाल है जो बताती है कि वह सही दिशा में है। अगर वह निराश होकर रुक जाए, तो अगला मौका किसी और को मिल जाएगा।

लूडो का एक और सबक है। कटने के बाद भी खेल जारी रहता है। जिंदगी में भी कई बार मेहनत की गोटी कट जाती है। सालों की कोशिश किसी एक गलती से पीछे चली जाती है। लेकिन खेल वहीं खत्म नहीं होता। जो फिर से शुरुआत करने का साहस रखता है, वही अंत में 'घर पहुंचता' है।

आज का सुविचार हमें यही बताता है कि हर दिन बड़ा मौका नहीं लाता, लेकिन हर दिन एक छोटा कदम जरूर देता है। उस कदम को नजरअंदाज मत कीजिए। एक फोन कॉल, एक ईमानदार कोशिश, एक नई आदत - ये सब 'एक' ही होते हैं, लेकिन इन्हीं से सफर आगे बढ़ता है।

इसलिए आज अगर आपकी जिंदगी में छह नहीं आया है, तो मायूस मत होइए। पासा फिर फेंका जाएगा। बस जरूरत है उस एक कदम को चलने की हिम्मत रखने की। क्योंकि जो चलता रहता है, वही अंत में जीतता है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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