Leh Flight Cancel: धरती का स्वर्ग कहा जाने वाला कश्मीर भी उत्तर भारत की तरह भीषण गर्मी का सामना कर रहा है और लेह-लद्दाख का भी यही हाल है। आलम यह है कि लेह-लद्दाख और कश्मीर का तापमान दिल्ली-मुंबई सहित उत्तर भारत में पड़ रही भीषण गर्मी के आसपास ही है। जिसकी वजह से कई फ्लाइट्स रद्द हो गईं। जी, हां। भीषण गर्मी की वजह से ठंडे केंद्रशासित प्रदेश लेह-लद्दाख से विमान संचालित नहीं हो पा रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भीषण गर्मी की वजह से पिछले तीन दिनों में 13 उड़ानें रद्द हुई हैं। अभी तक तो आप लोगों ने मूसलाधार बारिश और तूफान के बीच में उड़ानों को रद्द होते देखा है, लेकिन गर्मी की वजह से भी उड़ानें रद्द होती हैं और लेह-लद्दाख इसका जीता जागता उदारहण है तो चलिए समझते हैं कि आखिर गर्मी की वजह से उड़ानें क्यों रद्द हो जाती हैं।
लेह का दिल्ली जैसा तापमान
गर्मी से परेशान लोग अक्सर घूमने फिरने के लिए पहाड़ी राज्यों को चुनते हैं, लेकिन लेह का तापमान तो बिल्कुल दिल्ली जैसा है। हाल ही में लेह का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियत दर्ज किया गया। रविवार को तो आलम ऐसा था कि तापमान बढ़ने की वजह से लेह में चार उड़ानों को रद्द कर दिया गया, जबकि शनिवार को तो एक विमान की लैंडिंग तक नहीं हो पाई।
क्यों रद्द हो जाती हैं फ्लाइट?
तापमान ज्यादा होने की वजह से फ्लाइट ऑपरेशन में समस्याएं पैदा हो रही हैं, जिसकी वजह से एयरलाइन्स उड़ानें रद्द कर रही हैं। इंडिगो ने सोमवार को बयान जारी कर बताया कि लेह में तापमान ज्यादा होने और रनवे प्रतिबंधों की वजहों से सभी उड़ानों को रद्द करना पड़ा है।

लेह एयरपोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो)
क्या कहता है विज्ञान?
विमान के उड़ान भरने से पहले पायलट मौसम के तमाम पहलुओं पर नजर रखता है। जैसे- तापमान, हवा का दबाव इत्यादि। अगर मौसम खराब हो या फिर तापमान जरूरत से ज्यादा हो तो फ्लाइट डिले या फिर रद्द हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि पायलट विमान को गुरुत्वाकर्षण के विपरीत आसमान में लेकर जाता है और इसमें हवा का रोल काफी अहम होता है। आसान शब्दों में कहें तो भारी भरकम विमान को गुरुत्वाकर्षण के विपरीत टेकऑफ करने के लिए हवा के दबाव की जरूरत होती है, लेकिन तापमान ज्यादा होने की वजह से विमान को थ्रस्ट नहीं मिल पाता है।
अब आप सोच रहे होंगे कि लेह में तापमान तो दिल्ली के ही बराबर है और दिल्ली से विमान तो संचालित हो ही रहे हैं फिर लेह में क्यों रद्द हुए? दरअसल, लेह का एयरपोर्ट 11,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और लेह में ऑक्सीजन और नमी दोनों ही कम होती है। ऐसे में अगर तापमान अगर अपने चरम पर रहा तो विमान को जरूरी थ्रस्ट नहीं मिल पाएगा।
