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भारत में कब और कैसे आया कागज? हैरान कर देगी पन्नों की दास्तान

History of Paper: कागज मानव सभ्यता की एक ऐसी खोज है, जिसने ज्ञान को सहेजने और फैलाने के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया। चीन में विकसित यह तकनीक समय के साथ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंची और लेखन को अधिक सरल व सुलभ बनाया। भारत में कागज के आगमन से पहले भी पत्तों, पत्थरों और मौखिक परंपराओं के माध्यम से ज्ञान संरक्षण की एक समृद्ध परंपरा मौजूद थी। ऐसे में आइए जानें हमारे देश में कागज की यात्रा।

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भारत में कब और कैसे आया कागज?

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

History of Paper: कागज एक बहुत ही पतला और हल्का पदार्थ होता है, जिसे बुनाई के बिना तैयार किया जाता है। पारंपरिक रूप से इसका निर्माण पिसे हुए पौधों और कपड़ों से प्राप्त रेशों को मिलाकर किया जाता रहा है। इतिहास में कागज जैसी दिखने वाली सबसे शुरुआती वनस्पति आधारित लेखन सामग्री मिस्र की पैपिरस थी, लेकिन कागज बनाने की व्यवस्थित और वास्तविक विधि का पहला प्रमाण चीन में मिलता है। इतिहासकारों के मुताबिक, यह विधि पूर्वी हान वंश (25–220 ईस्वी) के समय विकसित हुई, जिसका श्रेय आमतौर पर शाही दरबार के अधिकारी काई लुन को दिया जाता है।

लुगदी से तैयार किए गए इस नए पदार्थ का उपयोग लेखन, चित्रांकन और मुद्रा निर्माण के लिए किया जाने लगा। 8वीं शताब्दी में कागज बनाने की यह तकनीक चीन से निकलकर इस्लामी दुनिया तक पहुंची, जहां धीरे-धीरे पैपिरस का प्रयोग समाप्त हो गया। 11वीं शताब्दी तक यह कला यूरोप पहुंच गई और वहां पशुओं की खाल से बने चर्मपत्र तथा लकड़ी के पटलों का स्थान कागज ने ले लिया। 13वीं शताब्दी में स्पेन में जल-शक्ति से चलने वाली कागज मिलों की स्थापना के साथ इस प्रक्रिया में और उन्नति हुई। आगे चलकर 19वीं शताब्दी में यूरोप में लकड़ी से कागज बनाने की तकनीक विकसित हुई, जिससे कागज का उत्पादन बड़े पैमाने पर संभव हो सका और इसकी उपलब्धता भी बढ़ गई।

When did paper come to India?

भारत में कब आया कागज?

भारत में कब और कैसे आया कागज?

भारत में कागज का आगमन एक लंबी ऐतिहासिक प्रक्रिया का परिणाम था। चीन में विकसित कागज बनाने की तकनीक सीधे भारत नहीं पहुंची, बल्कि पहले यह यूरोप तक गई और वहां से मध्य एशिया होते हुए धीरे-धीरे 13वीं सदी में भारत में आई। इस पूरी यात्रा में कागज को भारत तक पहुंचने में एक हजार वर्ष से भी अधिक समय लग गया। कागज के प्रचलन के कई साल बाद भारत में इसका स्थानीय उत्पादन शुरू हुआ।

देश का पहला कागज निर्माण केंद्र

देश का पहला कागज निर्माण केंद्र उत्तरी कश्मीर में स्थापित किया गया, जिसे वहां के शासक सुल्तान जैनुल आबिदीन ने शुरू कराया था। यह कारखाना आधुनिक मशीनों पर आधारित नहीं था, बल्कि इसमें सीमित स्तर पर ही यांत्रिक साधनों का उपयोग होता था। लगभग 10 से 20 प्रतिशत कार्य मशीनों द्वारा और शेष 80 प्रतिशत कार्य मानव श्रम से किया जाता था। उत्तरी कश्मीर में यह कागज कारखाना लगभग 1417 ईस्वी में स्थापित हुआ और करीब 1467 ईस्वी तक संचालित रहा। इस पहल ने भारत में कागज उद्योग की नींव रखी और आगे चलकर इसके विकास का मार्ग प्रशस्त किया।

Tradition of writing in India

भारत में लेखन की परंपरा

कागज से पहले भारत में लेखन की परंपरा

भारत में शिक्षा और लेखन की परंपरा प्राचीन काल से ही मौजूद थी, लेकिन उस समय तक कागज का प्रचलन नहीं हुआ था। इसलिए लोग ज्ञान और सूचनाओं को सुरक्षित रखने के लिए प्राकृतिक साधनों का उपयोग करते थे। लिखने के लिए मुख्य रूप से पेड़ों की पत्तियों और छाल का सहारा लिया जाता था। पत्तों में विशेष रूप से ताड़ और केले के पत्ते अधिक उपयोग में लाए जाते थे, क्योंकि वे आकार में लंबे, चौड़े और अपेक्षाकृत टिकाऊ होते थे। इसके अलावा पत्थरों पर लेख अंकित करने की परंपरा भी प्रचलित थी, जिसके प्रमाण आज भी देखने को मिलते हैं। अजंता और एलोरा की गुफाएं इसका जीवंत उदाहरण हैं, जहां शिलालेख और चित्रों के माध्यम से उस समय की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर सुरक्षित की गई है।

श्रौत परंपरा का महत्व

कागज के आने से भी पहले भारत में ज्ञान के संरक्षण और प्रसार के लिए श्रौत परंपरा का विशेष महत्व था। यह परंपरा वैदिक ग्रंथों यानी श्रुति पर आधारित थी, जिसमें यज्ञों और अनुष्ठानों की जटिल विधियां शामिल थीं। इसमें मंत्रों का विधिवत उच्चारण, तीन पवित्र अग्नियों (गार्हपत्य, आहवनीय और दक्षिणाग्नि) का संरक्षण तथा कठोर नियमों का पालन आवश्यक माना जाता था। इन अनुष्ठानों का उद्देश्य इस लोक और परलोक, दोनों में कल्याण और फल की प्राप्ति था। इस परंपरा से जुड़े नियम और विधियां श्रौत सूत्र नामक ग्रंथों में संकलित की गई हैं, जो प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण आधार माने जाते हैं।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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