नॉलेज

इस महल में दफन होने की ख्वाहिश थी मुगलों के आखिरी बादशाह की...पर जिंदगी को अलविदा कहा यहां

भारत में मुगल शासन की शुरुआत 1526 ईस्वी में बाबर की विजय के साथ हुई और यह साम्राज्य करीब तीन सदियों तक देश के इतिहास को आकार देता रहा। इस काल में मुगल शासकों ने न केवल प्रशासन बल्कि स्थापत्य कला को भी नई ऊंचाइयां दीं। बहादुर शाह जफर के समय बनी अंतिम मुगल इमारत के साथ ही इस गौरवशाली युग का अंत भी करीब आ गया। ऐसे में आइए जानें मुगलों की आखिरी इमारत के बारे में विस्तार से।

Image

कहां है मुगलों की आखिरी इमारत?

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Last Mughal Monument in India: भारत में मुगल शासन का आगाज 1526 ईस्वी में हुआ, जब बाबर ने पानीपत की पहली जंग में इब्राहिम लोदी को हाराया। जीत के बाद बाबर ने आगरा को अपनी सत्ता का केंद्र बनाया। इसके साथ ही भारत में मुगल साम्राज्य की नींव पड़ी, जो आगे चलकर लगभग तीन सौ सालों तक, यानी 1857 तक कायम रही। इस लंबे कालखंड में कई मुगल शासकों ने देश पर शासन किया और उनके समय में स्थापत्य कला को खास बढ़ावा मिला। ताज महल, लाल किला और जामा मस्जिद जैसी भव्य और ऐतिहासिक इमारतें इसी दौर की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। मुगल वंश के अंतिम सम्राट बहादुर शाह जफर के समय देश में अंतिम मुगल स्थापत्य का निर्माण कराया गया, जिसके साथ ही मुगल काल का अंत भी पास आ गया। ऐसे में आइए रूबरू होते हैं मुगलों की आखिरी इमारत से।

Name of the last building of the Mughals

मुगलों की आखिरी इमारत का नाम

मुगल काल की आखिरी इमारत कौन-सी है?

भारत में निर्मित अंतिम मुगल स्थापत्य के रूप में जफर महल को जाना जाता है। यह एक शानदार इमारत है, जिसका गहरा संबंध भारत के अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर से रहा। इस भवन को पूर्ण रूप देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। वहीं दूसरी ओर, यदि मुगल काल की पहली इमारत की बात की जाए, तो काबुली बाग मस्जिद का नाम सामने आता है, जो भारत में मुगल स्थापत्य की शुरुआती पहचान मानी जाती है।

कहां दफन होने की ख्वाइश थी बहादुर शाह जफर की?

जफर महल के निर्माण की शुरुआत मुगल सम्राट अकबर शाह द्वितीय ने करवाई थी, लेकिन उनके जीवनकाल में इसका केवल एक हिस्सा ही बन सका। बाद में उनके बेटे और भारत के अंतिम मुगल शासक बहादुर शाह जफर द्वितीय ने इस इमारत का विस्तार कराया और इसे पूर्ण स्वरूप दिया। बहादुर शाह जफर की यह इच्छा थी कि उनकी मौत के बाद उन्हें जफर महल में ही दफनाया जाए।

Bahadur Shah Zafar and Zafar Mahal

बहादुर शाह जफर और जफर महल

कहां ली मुगलों के आखिरी बादशाह ने अंतिम सांस

1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों ने बहादुर शाह जफर को हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार किया और उन पर मुकदमा चलाया। इस समय उन्हें दिल्ली के लाल किले में कैद रखा गया, जहां ब्रिटिश अधिकारी और उनके परिवार के सदस्य उन्हें देखने आते थे। मुकदमे का निर्णय आने के बाद उन्हें रंगून भेज दिया गया, वहीं उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सांस ली। अपनी बदकिस्मती को जाहिर करते हुए उन्होंने लिखा था— “कितना बदनसीब है जफर, दो गज जमीन भी न मिली कू-ए-यार में।”

जफर महल कहां है?

जफर महल दिल्ली के महरौली क्षेत्र में स्थित है। इसके पास ही प्रसिद्ध सूफी संत हजरत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह मौजूद है। इस महल परिसर में बहादुर शाह जफर द्वितीय के पिता अकबर शाह द्वितीय की कब्र भी स्थित है। अपने पिता की समाधि के पास ही बहादुर शाह जफर ने अपनी कब्र के लिए स्थान चिन्हित किया था, लेकिन रंगून भेज जाने के कारण उनकी यह इच्छा अधूरी रह गई।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!

संबंधित खबरें