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China Space Mission: चीन का 'शेंझोउ 23' मिशन लॉन्च; एक साल अंतरिक्ष में रहेगा एस्ट्रोनॉट, जानें 365 दिनों में क्या करेगा ये वैज्ञानिक

China Space Mission News: चीन ने रविवार रात 'शेंझोउ 23' अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इस मिशन का एक अंतरिक्ष यात्री पूरे एक साल तक 'तियांगोंग' स्पेस स्टेशन पर रहेगा। आइए जानते हैं ये स्पेस में क्या करने वाला है।

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एक साल तक स्पेस स्टेशन में रहेगा एक एस्ट्रोनॉट (स्क्रीनग्रैब: AP)

Photo : AP

Space News: अंतरिक्ष की दुनिया में अपना दबदबा कायम करने के लिए चीन ने रविवार रात एक और बड़ा दांव खेला है। चीन ने अपने 'तियांगोंग' (Tiangong) स्पेस स्टेशन के लिए तीन अंतरिक्ष यात्रियों के साथ 'शेंझोउ 23'(Shenzhou 23) अंतरिक्ष यान को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में रवाना किया। यह लॉन्चिंग ऐसे समय में हुई है जब चीन साल 2030 तक चंद्रमा पर अपने पहले मानव मिशन को भेजने की तैयारियों में जुटा है। इस मिशन की कमान कमांडर झू यांगझू (Zhu Yangzhu) के हाथों में है, जबकि उनके साथ झांग झियुआन (Zhang Zhiyuan) और हांगकांग की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री लाई का-यिंग (Lai Ka-ying) शामिल हैं। कंप्यूटर फॉरेंसिक में डॉक्टरेट की डिग्री रखने वाली लाई, हांगकांग से अंतरिक्ष मिशन पर जाने वाली पहली नागरिक बनी हैं।

एक साल अंतरिक्ष में रहकर क्या करेगा एस्ट्रोनॉट?

शेंझोउ 23 मिशन के तीन अंतरिक्ष यात्रियों में से एक को विशेष रूप से स्पेस स्टेशन पर पूरे एक साल तक रुकने के लिए शेड्यूल किया गया है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस एक साल के लंबे प्रवास के पीछे चीन का महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उद्देश्य है। आइए जानते हैं।

इंसानी सीमाओं और अनुकूलनशीलता की जांच: इस लंबी अवधि के अंतरिक्ष मिशन का मुख्य उद्देश्य "लंबे समय तक अंतरिक्ष के वातावरण में रहने पर मानव अनुकूलनशीलता और प्रदर्शन की सीमाओं (Human Adaptability and Performance Limits)" का पता लगाना है।

भविष्य के मून और मार्स मिशन की तैयारी: बिना गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) और अंतरिक्षीय रेडिएशन के बीच मानव शरीर और मस्तिष्क पर 365 दिनों में क्या बदलाव आते हैं, इसका बारीकी से अध्ययन किया जाएगा। यह डेटा चीन को 2030 के चंद्र मिशन और भविष्य के मंगल (Mars) अभियानों में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रखने में मदद करेगा।

दर्जनों वैज्ञानिक और व्यावहारिक प्रोजेक्ट्स: इसके अलावा चीनी चालक दल स्पेस स्टेशन की प्रयोगशालाओं में दर्जनों वैज्ञानिक प्रयोग, तकनीकी परीक्षण और बायोलॉजिकल एप्लीकेशन प्रोजेक्ट को अंजाम देगा।

अंतरिक्ष स्टेशन पर होगा 'इन-ऑर्बिट रोटेशन'

स्पेस स्टेशन पर पहुंचने के बाद शेंझोउ 23 के तीनों यात्री वहां पहले से मौजूद शेंझोउ 21 (Shenzhou 21) के क्रू मेंबर्स के साथ 'इन-ऑर्बिट रोटेशन' (काम सौंपने की प्रक्रिया) पूरा करेंगे। शेंझोउ 21 का क्रू पिछले 200 से अधिक दिनों से 'तियांगोंग' स्पेस स्टेशन पर तैनात है। काम सौंपने के बाद पुराना क्रू धरती पर वापस लौट आएगा।

अमेरिका वर्सेस चीन: स्पेस वॉर तेज

चीन का अपना स्पेस स्टेशन 'तियांगोंग' (जिसका अर्थ है- 'स्वर्गीय महल') पहली बार 2021 में पूरी तरह सक्रिय हुआ था। अमेरिका द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देकर चीन को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से बाहर रखे जाने के बाद चीन ने खुद का यह स्टेशन विकसित किया था। फिलहाल अमेरिका और चीन के बीच अंतरिक्ष में सर्वोच्चता हासिल करने की होड़ मची हुई है। जहां चीन 2030 तक चांद पर इंसान भेजने का लक्ष्य लेकर चल रहा है, वहीं अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) साल 2028 तक अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारने की तैयारी कर रही है। पिछले साल भी चीन के एक आपातकालीन मिशन 'शेंझोउ' (जिसका अर्थ है 'दिव्य पोत') ने तकनीकी खराबी के कारण फंसे अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित वापस लाकर अपनी क्षमता साबित की थी।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारी author

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृ... और देखें

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