महिला आरक्षण बिल पर आज संसद के विशेष सत्र में चर्चा हो रही है। इस चर्चा में भाग लेते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि दक्षिण के राज्यों को परिसीमन में किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि दक्षिण की सीटों की संख्या कम होने को लेकर एक नरेटिव बनाया जा रहा है, भ्रम फैलाया जा रहा है।
अमित शाह ने लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान कहा कि महिला आरक्षण बिल और परिसीमन के बाद कर्नाटक की 28 सीटें बढ़कर 42 हो जाएंगी। तमिलनाडु की सीटें भी 39 से बढ़कर 59 हो जाएंगी। केंद्रीय गृहमंत्री ने बताया कि इस तरह से पूरे दक्षिण भारत की लोकसभा सीटें 139 से बढ़कर 195 हो जाएंगी।
Nari Shakti Vandan Adhiniyam पर संसद में हो रही चर्चा पर अमित शाह ने कहा कि हमने डीलिमिटेशन कमीशन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस मुद्दे पर उन्होंने कहा कि KG के बच्चे को भी समझ में आए ऐसे समझाऊंगा, बस कल धैर्य रखना।
गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि मैजूदा सरकार लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है। इस पर उन्होंने कहा कि किसी की भी ताकत नहीं है, इस देश से लोकतंत्र खत्म करने की। अमित शाह ने आगे कहा कि जिसने भी देश से लोकतंत्र खत्म करने का प्रयास किया है, जनता ने उसे ही खत्म कर दिया है। इस अवसर पर उन्होंने आपातकाल का भी जिक्र किया।
अमित शाह ने लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान दक्षिण के राज्यों की चिंता दूर करते हुए निम्न बातें कहीं -
- कर्नाटक के पास वर्तमान में 28 लोकसभा सीटें हैं, जो कुल 543 का 5.15% है। विधेयक के बाद सीटें बढ़कर 42 होंगी और हिस्सा 5.44% हो जाएगा। इससे साफ है कि राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा।
- आंध्र प्रदेश की 25 सीटें अभी 4.60 फीसद हिस्सेदारी देती हैं। विधेयक लागू होने के बाद सीटें 38 हो जाएंगी और प्रतिशत 4.65% तक बढ़ेगा। यानी राज्य की हिस्सेदारी में हल्की बढ़ोतरी ही देखने को मिलेगी।
- तेलंगाना की मौजूदा 17 सीटें 3.13% प्रतिनिधित्व देती हैं। नई व्यवस्था में सीटें बढ़कर 26 हो जाएंगी और प्रतिशत 3.18% होगा। इससे स्पष्ट है कि राज्य का प्रतिनिधित्व घटने के बजाय थोड़ा बढ़ेगा।
- तमिलनाडु के पास अभी 49 सीटें (7.18%) हैं। प्रस्तावित बदलाव के बाद यह 59 सीटें और 7.23% हिस्सेदारी हो जाएगी। इससे यह साफ है कि राज्य को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा।
- केरल की 20 सीटें अभी 3.68 फीसद हिस्सेदारी देती हैं। विधेयक के बाद सीटें 30 हो जाएंगी, जबकि प्रतिशत 3.67% रहेगा। यानी प्रतिनिधित्व लगभग स्थिर रहेगा और कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा।
