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LoC पर तैनात जवानों की कलाइयों पर बहनों ने बांधी राखी, सैनिकों के शौर्य-पराक्रम को किया सलाम

जवानों ने बहनों से वादा किया कि वे हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा करेंगे। जवानों ने महिलाओं को उपहार भी दिए। परंपरागत तरीके से तिलक लगाकर सैनिकों को राखी बांधते हुए महिलाओं ने उन्हें सलामती का आशीर्वाद दिया। सैनिकों ने बहनों को मिठाई खिलाते हुए उपहार दिए।

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जवानों को राखी बांधतीं महिलाएं। तस्वीर-PTI

Photo : PTI

Women tie rakhis to soldiers in Akhnoor : राखी के दिन सीमा की सुरक्षा में डंटे जवानों की कलाई राखी के बगैर सूनी न रह जाए इसके लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (LoC) के करीब रहने वाली महिलाओं ने सैनिकों की कलाई पर राखी बांधी है। महिलाओं ने जवानों के शौर्य-पराक्रम और उनके बलिदान को याद किया। ये महिलाएं जम्मू जिले के अखनूर सेक्टर में आईं और जवानों को राखी बांधीं। बहनों का ये स्नेह एवं प्रेम देखकर सैनिक भी भावविभोर हो गए।

जवानों ने देश की रक्षा का संकल्प दोहराया

जवानों ने बहनों से वादा किया कि वे हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा करेंगे। जवानों ने महिलाओं को उपहार भी दिए। परंपरागत तरीके से तिलक लगाकर सैनिकों को राखी बांधते हुए महिलाओं ने उन्हें सलामती का आशीर्वाद दिया। सैनिकों ने बहनों को मिठाई खिलाते हुए उपहार दिए।

पेड़-पौधों और वृक्षों को रक्षासूत्र बांधा

भारत-पाकिस्तान सीमा के पास के स्कूलों में पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालने के लिए रक्षाबंधन पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान छात्रों ने पेड़-पौधों और वृक्षों को रक्षासूत्र बांधा। छात्रों ने कहा कि जिस तरह सुरक्षा बल सीमाओं की रक्षा करते हैं, उसी तरह पेड़ भी स्वच्छ हवा प्रदान करके हमारी रक्षा करते हैं। कार्यक्रम के दौरान, बच्चों ने पौधों को राखी बांधी और सभी से इस रक्षाबंधन पर एक-दूसरे और पर्यावरण की रक्षा के लिए ऐसे ही कदम उठाने का आग्रह किया।

पिछले 26 वर्षों से राखी लेकर आती हैं कंचन

वहीं, जम्मू-कश्मीर के सामा चक से 18 ग्रेनेडियर्स के शहीद वीर उदयमान सिंह की बहन कंचन, जो पिछले 26 वर्षों से हर रक्षाबंधन पर अपने भाई के पास राखी लेकर पहुंचती हैं। कंचन ने आईएएनएस न्यूज एजेंसी से बात करते हुए बताया कि मेरे भाई को शहीद हुए 26 साल हो चुके हैं, उन्होंने टाइगर हिल पर शहादत दी थी और कभी भी पीठ नहीं दिखाई। बचपन की बात करें तो जब भी भाई घर पर होते थे, हम रक्षाबंधन बड़े उत्साह के साथ मनाते थे। लेकिन, जब वह सेना में सेवा दे रहे थे, तब मैं उन्हें टेलीग्राम के जरिए राखी भेजती थी। वे उस राखी का बेसब्री से इंतजार करते थे। टेलीग्राम से जब भी उनका खत आता था, उसमें उनके प्यार के तोहफे और कुछ पैसे भी होते थे।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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