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क्या जेल से बाहर आएंगे उमर खालिद, शरजील इमाम? जमानत अर्जियों पर आज फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट

उमर और शर्जील पर दिल्ली दंगों की साजिश रचने का आरोप है। राजधानी दिल्ली में दंगे फरवरी 2020 में हुए थे। उमर और शर्जील जमानत के लिए कई बार कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 10 दिसंबर को मामले की सुनवाई के बाद अफना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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दोनों पर दिल्ली दंगों की साजिश रचने का है आरोप। तस्वीर-PTI

Photo : PTI

Umar Khalid, Sharjeel Imam : दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में बीते पांच वर्षों में जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को फैसला सुनाने वाला है। इनके अलावा कोर्ट पांच अन्य आरोपियों की जमानत अर्जियों पर भी सुनवाई करेगा। उमर और शरजील पर दिल्ली दंगों की साजिश रचने का आरोप है। राजधानी दिल्ली में दंगे फरवरी 2020 में हुए थे। उमर और शरजील जमानत के लिए कई बार कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली है।

10 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 10 दिसंबर को दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू तथा आरोपियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक सिंघवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ लूथरा की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

दंगों में 53 लोग मारे गए थे

सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के बाद दिल्ली दंगा उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। क्षेत्र में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दंगों की साजिश से जुड़े मामले में उमर सहित अन्य आरोपियों को जमानत देने से दो सितंबर को इनकार कर दिया था। इसके बाद आरोपियों ने उक्त फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था।

उमर-शरजील पर मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप

2020 में दर्ज हुआ था केस उमर, शरजील और अन्य पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का 'मुख्य साजिशकर्ता' होने का आरोप है। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय न्याय संहिता (आईपीसी) के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने दंगों की साजिश से जुड़े मामले में उमर सहित अन्य आरोपियों को जमानत देने से दो सितंबर को इनकार कर दिया था। इसके बाद आरोपियों ने उक्त फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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