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हेमंत सोरेन के बाद क्या अब अरविंद केजरीवाल को भी मिलेगी जमानत? AAP ने बनाई ये रणनीति

AAP vs BJP: झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन को जमीन घोटाला मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने जमानत दे दी, जिसके बाद वो बिरसा मुंडा जेल से रिहा हो गए हैं। अब सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या सोरेन के बाद दिल्ली के कथित आबकारी घोटाला मामले सीएम केजरीवाल को जमानत मिलेगी?

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केजरीवाल की रिहाई के लिए AAP का प्रदर्शन।

Photo : Times Now Digital

Arvind Kejriwal Case Update: अरविंद केजरीवाल का क्या होगा? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि उनकी जमानत का पेंच अब तक फंसा हुआ है। निचली अदालत से जमानत मिलने के अगले ही दिन दिल्ली हाईकोर्ट ने उस पर रोक लगा दी। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं की आस बढ़ गई है। आम आदमी पार्टी इसके लिए मोर्चा खोल दिया है।

आम आदमी पार्टी ने खोला मोर्चा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत मिलेगी या नहीं, इस सवाल का जवाब हर कोई तलाश रहा है। हालांकि तस्वीरें अब तक साफ नहीं हो पाई हैं हालांकि उनकी पार्टी AAP ने भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। केजरीवाल की रिहाई को लेकर भाजपा मुख्यालय के पास आम आदमी पार्टी ने प्रदर्शन किया। केजरीवाल जेल से रिहा होंगे या नहीं इसका जवाब अदालत से मिलेगा, सियासी उठापटक का दौर जारी है। एक ओर भाजपा ने दिल्ली की सड़कों पर जलभराव को लेकर केजरीवाल सरकार को कटघरे में खड़ा किया है, दूसरी ओर भाजपा पर आम आदमी पार्टी लगातार ये आरोप लगा रही है केजरीवाल को जेल में डालने के पीछे भाजपा की साजिश है।

दिल्ली की सड़कों पर आप का प्रदर्शन

आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की रिहाई की मांग को लेकर यहां दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) मार्ग स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्यालय के निकट प्रदर्शन किया। केजरीवाल दिल्ली सरकार की आबकारी नीति के सिलसिले में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की हिरासत में हैं।

21 मार्च को हुई थी केजरीवाल की गिरफ्तारी

इससे पहले, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 मार्च को दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े धन शोधन मामले में उन्हें गिरफ्तार किया था। उन्हें निचली अदालत से जमानत मिल गई थी जिस पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी। प्रदर्शनकारी डीडीयू मार्ग पर भाजपा मुख्यालय के निकट आप कार्यालय में एकत्र हुए और केजरीवाल की रिहाई की मांग करते हुए भाजपा के खिलाफ नारे लगाए।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को भाजपा मुख्यालय की ओर मार्च करने से रोकने की व्यवस्था की गई है क्योंकि विरोध प्रदर्शन के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए अवरोधक लगाये गए हैं और अर्धसैनिक बलों के जवानों को मौके पर तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि अगर जरूरत पड़ी तो प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया जा सकता है क्योंकि डीडीयू मार्ग पर पहले से धारा 144 लगा दी गई है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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