‘वंदे मातरम्’ को लेकर छिड़े विवाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस ने अमित शाह के उस बयान पर पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत का अपमान करने का आरोप लगाते हुए माफी की मांग की थी। कांग्रेस ने कहा कि माफी की मांग ‘वास्तविक मुद्दों’ और अमित शाह व उनके ‘साहब की बड़ी नाकामियों’ से ध्यान भटकाने की कोशिश है।
जयराम रमेश ने अमित शाह पर साधा निशाना
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमित शाह पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमित शाह अब कांग्रेस से माफी की मांग कर रहे हैं ताकि देश के असली मुद्दों और सरकार की कथित नाकामियों से लोगों का ध्यान हटाया जा सके। रमेश ने अमित शाह पर डॉ. बी.आर. आंबेडकर का अपमान करने का आरोप लगाया। साथ ही और कहा कि जिस विचारधारा से वह जुड़े हैं, उसने जनवरी 2002 तक अपने संगठन के मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के पीछे अमित शाह की भूमिका रही।
पवन खेड़ा ने भी BJP और संघ पर हमला बोला
कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी पलटवार करते हुए कहा कि जब ‘वंदे मातरम्’ का नारा लगाने वालों पर लाठियां बरसाई जाती थीं, तब कांग्रेस ने इसी गीत के जरिए आजादी की लड़ाई का बिगुल फूंका था। उन्होंने RSS और संघ से जुड़े लोगों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की और आरोप लगाया कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका सवालों के घेरे में रही।
कांग्रेस नेताओं ने पुराने राज्यसभा भाषण का वीडियो साझा किया
कांग्रेस नेताओं ने जयराम रमेश के 10 दिसंबर 2025 के राज्यसभा भाषण का वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया। यह भाषण ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुई चर्चा के दौरान दिया गया था। उस दौरान रमेश ने भाजपा पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया था। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सुभाष चंद्र बोस, रवींद्रनाथ टैगोर, राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल समेत कई नेताओं के बीच हुए पत्राचार और चर्चाओं का जिक्र किया था।
रमेश ने कहा था कि 28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर प्रस्ताव पारित किया था। उन्होंने बताया था कि टैगोर की सलाह के बाद गीत के पहले दो छंदों को अपनाया गया, जिन्हें बाद में राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया।
