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गिरिबाला को अग्रिम जमानत देने के निचली अदालत के फैसले को गलत क्यों ठहराया? जबलपुर बेंच ने अपने फैसले में क्या कहा

बुधवार देर रात जारी अपने 17 पन्नों के आदेश में न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकल पीठ ने कहा कि मामले के तथ्यात्मक पहलुओं और प्रतिवादी गिरिबाला सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों के आलोक में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, भोपाल द्वारा 15 मई 2026 को पारित अग्रिम जमानत आदेश को रद्द किया जाता है।

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गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द हो गई है।

Twisha Sharma Death Case: ट्विशा शर्मा की मौत मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बुधवार को उसकी सास और पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी। बुधवार देर रात जारी अपने 17 पन्नों के आदेश में न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकल पीठ ने कहा कि मामले के तथ्यात्मक पहलुओं और प्रतिवादी गिरिबाला सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों के आलोक में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, भोपाल द्वारा 15 मई 2026 को पारित अग्रिम जमानत आदेश को रद्द किया जाता है। यहां हम जानेंगि कि हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने गिरिबाला को अग्रिम जमानत देने के निचली अदालत के फैसले को गलत क्यों ठहराया?

हाईकोर्ट ने केस डायरी और सबूतों की दोबारा जांच की और पाया कि निचली अदालत ने बहुत ही महत्वपूर्ण और गंभीर तथ्यों को पूरी तरह नजरंदाज कर दिया था

1.शादी के महज 5 महीने में मौत: दोनों की शादी 09 दिसंबर 2025 को हुई थी और लड़की ने 12 मई 2026 को आत्महत्या कर ली। कानूनन, शादी के 7 साल के भीतर संदिग्ध मौत होने पर दहेज प्रताड़ना का कड़ा संदेह पैदा होता है।

2.शरीर पर चोट के निशान (सबसे बड़ा सबूत): पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि मौत भले ही फंदे पर लटकने से हुई, लेकिन मृतका के शरीर पर 6 अन्य चोटें थीं (4 बाएं हाथ पर, 1 उंगली पर और 1 सिर पर)। डॉक्टरों की 'क्वेरी रिपोर्ट' ने साफ किया कि ये चोटें शव को फंदे से उतारते समय या अस्पताल ले जाते समय नहीं लगी थीं, बल्कि मौत से पहले मारपीट के कारण आई थीं।

3.गर्भपात का दबाव: रेखा रानी शर्मा, मीनाक्षी शर्मा और अन्य गवाहों के बयानों से साफ था कि सास और उसका बेटा मिलकर बहू पर गर्भपात कराने का लगातार दबाव बना रहे थे और उसे प्रताड़ित कर रहे थे। व्हाट्सएप चैट्स में भी सिर्फ पति नहीं, बल्कि सास के खिलाफ भी साफ सबूत थे।

4.पैसों के लेन-देन की सच्चाई: कोर्ट ने कहा कि शादी के दौरान या बहू के विदेश जाने के समय किए गए पैसों के लेन-देन को आधार बनाकर यह नहीं माना जा सकता कि मृतका को प्रताड़ित नहीं किया जा रहा था।

5.कानून के साथ असहयोग: अग्रिम जमानत मिलने के बाद आरोपी महिला को पुलिस ने बयान दर्ज कराने के लिए कई नोटिस भेजे लेकिन वह जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुई और जांच में सहयोग नहीं किया।

ट्विशा की सास गिरिबाला को अग्रिम जमानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट के किन कानूनी सिद्धांतों का इस्तेमाल हुआ? हाई कोर्ट ने अपने फैसले को मजबूत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दो बड़े फैसलों का हवाला दिया:

1.विपिन कुमार धीर बनाम पंजाब राज्य (2021)

2.दौलत राम बनाम हरियाणा राज्य (1995)

इन फैसलों के आधार पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

1.जमानत देना और जमानत रद्द करना अलग बातें हैं: जमानत रद्द करने के लिए बेहद 'ठोस और मजबूत कारणों' की आवश्यकता होती है।

2.जमानत कब रद्द हो सकती है? यदि आरोपी जमानत का दुरुपयोग करे, न्याय की प्रक्रिया में बाधा डाले, गवाहों को डराए-धमकाए, या पुलिस जांच में सहयोग न करे।

3.निचली अदालत की कानूनी चूक: यदि निचली अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद महत्वपूर्ण सबूतों (जैसे इस केस में चोट के निशान और गवाहों के बयान) को छोड़ दिया हो या गैर-जरूरी बातों को देखकर जमानत दे दी हो, तो वह आदेश कानूनी रूप से गलत हो जाता है और ऊपरी अदालत उसे रद्द कर सकती है।

हाईकोर्ट ने माना कि यह अपराध अत्यंत गंभीर श्रेणी का है, जो हमारे आधुनिक समाज में अभी भी मौजूद पिछड़ी या मध्यकालीन सोच को दर्शाता है। इसलिए कोर्ट ने आरोपी महिला गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया।

अग्रिम जमानत देते समय क्या ध्यान रखना जरूरी है?

हाईकोर्ट ने साफ किया है कि अग्रिम जमानत अपने आप में एक असाधारण राहत है। इसे देते समय कोर्ट को इन चार बातों को कभी नहीं भूलना चाहिए

1. गवाहों को प्रभावित करना: क्या आरोपी सरकारी गवाहों को प्रभावित कर सकता है?

2. धमकी देना: क्या वह पीड़ित या मृतक के परिवार वालों को डरा-धमका सकता है?

3. भाग जाना: क्या आरोपी के कानून की गिरफ्त से भागने का खतरा है?

4. जांच में बाधा: क्या वह निष्पक्ष जांच में कोई रुकावट पैदा कर सकता है?

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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