भारत का सैन्य ढांचा क्षेत्रीय खतरों (चीन और पाकिस्तान) पर आधारित है, न कि वैश्विक सैन्य अभियान पर। सामरिक बमवर्षक बड़े देशों के लिए होते हैं जो दुनिया भर में ऑपरेशन करते हैं—जैसे अमेरिका, रूस। भारत को इतनी लंबी दूरी तक जाकर बम गिराने की आवश्यकता नहीं। (फोटो- chatgpt)
भारतीय वायु सेना के पास ऐसे विमान हैं जो लड़ाकू और बमवर्षक दोनों की भूमिकाएं निभा सकते हैं। इनमें सुखोई-30, जो भारतीय वायु सेना का एक भरोसेमंद विमान है, और राफेल शामिल हैं। जो पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश के अंदर घुसकर बमबारी करने की क्षमता रखते हैं और कई बार सफल हमले को अंजाम दे चुके हैं। (AI फोटो- Copilot)
ऐसा नहीं है कि भारत सामरिक बमवर्षक खरीदने पर विचार नहीं कर रहा है। चीन को देखते हुए भारत भी अब अपने पास सामरिक बमवर्षक प्लेन रखने की योजना पर काम कर रहा है और इसके लिए रूस से बात भी चल रही है। (AI फोटो- Copilot)
एक रणनीतिक बमवर्षक को आप वायु सेना का एयरबोर्न एयरक्राफ्ट कैरियर समझ सकते हैं- जैसे समुद्र में विमानवाहक पोत दुश्मन नौसेना पर दबदबा स्थापित करता है, वैसे ही बमवर्षक अपनी मारक क्षमता और दूरी दोनों में अभूतपूर्व बढ़त देता है। भविष्य में भारत जिन विकल्पों पर विचार कर सकता है, उनमें रूस का टीयू-160 ‘व्हाइट स्वान’ प्रमुख है- यह 12,000 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है, लगभग 45,000 किलो हथियार ले जा सकता है और मैक 2.05 की रफ्तार से उड़ता है, जो कई आधुनिक लड़ाकू विमानों से भी तेज है। (AI फोटो- Socio Pulse)
दुनिया में असली रणनीतिक बमवर्षक क्षमता सिर्फ तीन देशों के पास है—अमेरिका, रूस और चीन। इन देशों के पास ऐसे भारी, लंबी दूरी तक उड़ने वाले और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम विमान हैं, जो हजारों किलोमीटर दूर जाकर दुश्मन के लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं। (फोटो- Canva)
अमेरिका के पास B-52, B-1B, B-2 स्टील्थ और नया B-21 जैसे दुनिया के सबसे उन्नत बमवर्षक हैं। रूस TU-95, TU-160 और TU-22M3 जैसे बड़े और शक्तिशाली बमवर्षक संचालित करता है। (फोटो- Canva)
चीन H-6 सीरीज़ का इस्तेमाल करता है और H-20 नामक स्टील्थ बमवर्षक का विकास कर रहा है। इन तीन देशों के अलावा किसी भी राष्ट्र के पास ऑपरेशनल रणनीतिक बमवर्षक नहीं हैं। फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों के पास ऐसे विमान पहले थे, लेकिन अब उनकी जगह मिसाइल आधारित परमाणु क्षमता ने ले ली है। (फोटो- Canva)