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भगवान राम थे मांसाहारी, 14 साल जंगल में शाकाहारी भोजन कहां मिलेगा...NCP नेता जितेंद्र आव्हाड ने छेड़ा विवाद

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Jan 4, 2024, 02:38 PM IST

Jitendra Awhad: आव्हाड ने सवाल किया कि 14 साल तक जंगल में रहने वाले व्यक्ति को शाकाहारी भोजन कहां मिलेगा, जिससे इस मामले पर बहस छिड़ गई।

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जितेंद्र आव्हाड

Jitendra Awhad: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार गुट के नेता जितेंद्र आव्हाड ने भगवान राम पर अपने बयान से विवाद खड़ा कर दिया है। आव्हाड ने आम धारणा के विपरीत दावा किया कि भगवान राम बहुजन थे और मांसाहारी थे। आव्हाड का यह तब आया जब भाजपा विधायक राम कदम ने महाराष्ट्र सरकार से 22 जनवरी को अयोध्या अभिषेक समारोह के दिन एक दिन के लिए शराब और मांस पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया था।

आव्हाड ने बयान पर मांगी माफी

बाद में आव्हाड ने भगवान राम पर अपनी टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा कि वह जो भी कहते हैं वह शोध पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्होंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है तो वह माफी मांगते हैं। महाराष्ट्र के शिरडी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आव्हाड ने पहले कहा था, राम हमारे हैं। राम बहुजनों के हैं। शिकार करके खाने वाले राम हमारे हैं, हम बहुजनों के हैं। जब आप लोग हम सभी को शाकाहारी बनाने जाते हैं, तो हम इसका पालन करते हैं। राम के आदर्श और आज हम मटन खाते हैं। यही राम का आदर्श है। राम शाकाहारी नहीं थे, मांसाहारी थे।

आव्हाड बोले, 14 साल जंगल में शाकाहारी भोजन कहां मिला होगा

आव्हाड ने यह भी सवाल किया कि 14 साल तक जंगल में रहने वाले व्यक्ति को शाकाहारी भोजन कहां मिलेगा, जिससे इस मामले पर बहस छिड़ गई। अपने विवादित बयान को आगे बढ़ाते हुए आव्हाड ने कहा, चाहे कोई कुछ भी कहे, सच्चाई यह है कि हमें आजादी केवल गांधी और नेहरू की वजह से मिली। गांधीजी की हत्या 1947 में नहीं हुई थी, बल्कि उन पर पहला हमला 1935 में हुआ था, दूसरा हमला 1938 में हुआ, तीसरा हमला 1942 में हुआ।

कहा, गांधीजी पर हमला जातिवाद के कारण हुआ

उन्होंने दावा किया कि गांधीजी पर हमले जातिवाद के कारण हुए थे, क्योंकि वह एक बनिया और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से थे। आव्हाड ने जनता के बीच ऐतिहासिक जागरूकता की कमी की आलोचना की और कहा कि गांधीजी की हत्या के पीछे असली कारण जातिवाद था। आव्हाड की टिप्पणी के जवाब में भाजपा विधायक राम कदम ने वास्तविक हिंदू और मराठी मुद्दों की उपेक्षा के बारे में चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर आज स्वर्गीय बाला साहेब जीवित होते तो सामना अखबार भगवान राम को मांसाहारी कहने वालों की कड़ी आलोचना करता।

अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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