CAQM News : दिल्ली-NCR और पंजाब में प्रदूषण से निपटने की कोशिशों के बीच अब शहरों और राज्यों के प्रदर्शन को रैंकिंग के जरिए सामने लाने की तैयारी हो सकती है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट यानी CAQM एक ऐसा एयर क्वालिटी इंडेक्स तैयार करने पर काम कर रहा है, जिसमें प्रदूषण कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों और स्थानीय एक्शन प्लान पर अमल की प्रगति को आधार बनाया जा सकता है। यह रैंकिंग केंद्र सरकार के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की तर्ज पर तैयार किए जाने की संभावना है।
CAQM इस तरह के इंडेक्स पर काम करने के बारे में विचार कर रहा है। उनके मुताबिक NCR के राज्यों और शहरों के लिए पहले से ही अलग-अलग एक्शन प्लान मौजूद हैं। ऐसे में इन योजनाओं के तहत अब तक हुई प्रगति को एक इंडेक्स के जरिए सामने लाने की कोशिश की जा सकती है।
अलग-अलग पैरामीटर पर हो सकता है आकलन
प्रस्तावित इंडेक्स में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अलग-अलग घटकों में किए गए काम को शामिल किया जा सकता है। इसके लिए अलग-अलग मानकों को weighted average के आधार पर जोड़कर शहरों या राज्यों के प्रदर्शन का आकलन किए जाने की संभावना है। इसमें यह देखा जा सकता है कि किस शहर या राज्य ने प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर कितना काम किया है और अपने स्थानीय एक्शन प्लान के लक्ष्यों की दिशा में कितनी प्रगति की है।
बेहतर प्रदर्शन करने वालों को मिल सकता है सम्मान
CAQM की योजना के मुताबिक इस तरह के इंडेक्स का उद्देश्य केवल शहरों को नंबर देना नहीं, बल्कि यह पहचानना भी हो सकता है कि प्रदूषण नियंत्रण के किस क्षेत्र में कौन-सा राज्य या शहर बेहतर काम कर रहा है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों या राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें सम्मानित किए जाने की संभावना भी जताई गई है। हालांकि, रैंकिंग का अंतिम प्रारूप, पैरामीटर, स्कोरिंग सिस्टम और इसे कब से लागू किया जाएगा, इस पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी माना जा रहा है। CAQM फिलहाल इंडेक्स तैयार करने की प्रक्रिया और इसके संभावित मानकों पर काम कर रहा है।CAQM का बड़ा फैसला: इंडस्ट्री में PTZ कैमरों से होगी रियल टाइम निगरानी
- CAQM ने NCR की इंडस्ट्री में PTZ कैमरों की कवरेज बढ़ाने का आदेश दिया है।
- अब कैमरों से ईंधन के इस्तेमाल और नियमों के पालन की रियल टाइम निगरानी की जाएगी।
- इंडस्ट्री में सभी फ्यूल स्टोरेज एरिया और फ्यूल चार्जिंग पॉइंट कैमरे की निगरानी में होंगे।
- गैस आधारित ईंधन इस्तेमाल करने वाली यूनिट में गैस का मीटर/गेज भी कैमरे में कैद होना जरूरी होगा।
- नई व्यवस्था के तहत 31 अक्टूबर 2026 तक अतिरिक्त PTZ कैमरे लगाने होंगे।
- कैमरों की लाइव वीडियो फीड CPCB और संबंधित SPCB/DPCC के सर्वर पर उपलब्ध करानी होगी।
- कैमरों और इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए पावर बैकअप रखना भी अनिवार्य होगा।
- CPCB और संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए पोर्टल और जरूरी सिस्टम तैयार करेंगे।
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को 1 नवंबर 2026 तक लागू व्यवस्था की रिपोर्ट CAQM को देनी होगी।
- CAQM के फ्लाइंग स्क्वॉड की जांच में कई इंडस्ट्री में अनुमोदित नहीं किए गए ईंधन के इस्तेमाल के मामले सामने आए थे।
- इसी को देखते हुए ईंधन की खपत पर सीधी और लगातार निगरानी का फैसला लिया गया है।
- पहले से ही कुछ इंडस्ट्री में PTZ कैमरों के जरिए OCEMS पोर्ट, चिमनी से निकलने वाला धुआं, फर्नेस और फ्यूम एक्सट्रैक्शन एरिया की निगरानी का प्रावधान था।
- अब फ्यूल स्टोरेज और फ्यूल चार्जिंग पॉइंट भी निगरानी के दायरे में आ गए हैं।
ऐसे तैयार हो रहा इंडेक्स
- रैंकिंग में प्रदूषण कम करने की दिशा में शहर/राज्य की प्रगति और अपने तय किए गए लोकल एक्शन प्लान के लक्ष्यों पर काम देखा जाएगा।
- इसके लिए अलग-अलग मानकों को वेटेड एवरेज के जरिए जोड़कर इंडेक्स बनाने की बात कही गई है।
- इसमें यह भी देखा जाएगा कि किस शहर/राज्य ने प्रदूषण के किस स्रोत पर कितना काम किया।
- मकसद सिर्फ रैंकिंग नहीं, बल्कि शहरों और राज्यों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करना है।
- CAQM की प्रस्तावित रैंकिंग केंद्र के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण से अलग होगी। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण अभी MoEFCC के तहत 130 NCAP शहरों का सालाना आकलन करता है।
