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कौन हैं पूजा खेडकर? बार-बार झूठ बोलकर बनीं IAS, ऑडी कार पर लगाती हैं नीली बत्ती...सामने आए फर्जी प्रमाणपत्र

Who is IAS Pooja Khedkar: पुणे में तैनाती के दौरान अपने नखरों के कारण पूजा खेडकर चर्चा में आई थीं। कुछ दिन पहले वह अपनी निजी ऑडी कार में नीली-लाल बत्ती लगाने के कारण विवादों में रहीं थीं। अब पूजा खेडकर पर फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर सिविल सेवा परीक्षा पास करने का आरोप लगा है।

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IAS Pooja Khedkar

Photo : Twitter

Who is IAS Pooja Khedkar: महाराष्ट्र कैडर की आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। इस पर उनपर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आईएएस की नौकरी पाने का आरोप लगा है। एक अधिकारी ने बताया है कि 2022 बैच की IAS अधिकारी पूजा खेडकर ने सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए कथित तौर पर फर्जी दिव्यांगता और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाण पत्र जमा किए थे।

बता दें, कुछ दिन पहले पूजा खेडकर पर पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगा था। वह अपनी निजी ऑडी कार पर लाल-नीली बत्ती और वीआईपी नंबर प्लेट का इस्तेमाल करती थीं। शिकायतें सामने आने के बाद उन्हें पुणे जिले से वाशिम ट्रांसफर कर दिया गया था। अब सामने आया है कि उन्होंने कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्रों का उपयोग किया था।

IAS पूजा खेडकर पर क्या है आरोप?

एक अधिकारी ने बताया कि पूजा खेडकर ने ओबीसी और दृष्टिबाधित श्रेणियों के तहत सिविल सेवा परीक्षा दी थी और उन्होंने मानसिक बीमारी का प्रमाण पत्र भी जमा किया था। अप्रैल 2022 में उन्हें अपने दिव्यांगता प्रमाण पत्र के सत्यापन के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली जाने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने कोरोना वायरस संक्रमण का हवाला देते हुए ऐसा नहीं किया। अधिकारी ने बताया कि उनके पिता दिलीप खेडकर (जो राज्य सरकार के पूर्व अधिकारी हैं) ने हालिया लोकसभा चुनाव लड़ते समय अपनी संपत्ति का मूल्य 40 करोड़ रुपये घोषित किया था। जबकि, पूजा खेडकर ओबीसी श्रेणी के तहत सिविल सेवा परीक्षा में शामिल हुईं, जहां क्रीमी लेयर सीमा आठ लाख रुपये वार्षिक पैतृक आय है।

पिता और दादा रहे चुके हैं प्रशासनिक अधिकारी

पूजा खेडकर एक प्रशासनिक परिवार से आती हैं। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) में 841वहीं रैंक हासिल की थी। पूजा खेडकर के पिता दिलीप खेडकर महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) में अधिकारी रह चुके हैं। उनके दादा भी प्रशासनिक अधिकारी थे। पूजा खेडकर की मां अहमदनगर जिले के भालगांव की निर्वाचित सरपंच हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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