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कौन हैं धीरज साहू? जिनके ठिकानों से बरामद हुआ करोड़ों का खजाना, जानें छापेमारी से जुड़ा हर अपडेट

Who is Dheeraj Sahu: कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू के ठिकानों से लगभग 200 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए हैं। आयकर विभाग की छापेमारी में नोटों से भरी करीब 30 अलमारियां मिली हैं। धीरज तीन बार राज्यसभा सांसद रहे और उन्होंने दो बार लोकसभा चुनाव भी लड़ा है।

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कांग्रेस सांसद धीरज साहू को जानिए।

Photo : Times Now Digital

IT Raids News: आयकर विभाग ने झारखंड से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू, उनके करीबियों और रिश्तेदारों के ठिकानों पर छापेमारी में करोड़ों का खजाना बरामद किया है। विभाग ने ओडिशा स्थित शराब बनाने वाली एक कंपनी के खिलाफ कर चोरी के आरोप में शुक्रवार को तीसरे दिन भी छापे मारे और नकदी से भरे 156 बैग बरामद किए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन बैग से बरामद नकदी में से अब तक 20 करोड़ रुपये गिने जा चुके हैं। इसके साथ ही छापेमारी में अब तक 220 करोड़ रुपये बरामद किए गए हैं। आपको बताते हैं आखिर धीरज प्रसाद साहू कौन हैं?

देसी शराब के कारोबार में 40 सालों से है साहू परिवार

ओडिशा में शराब का बड़ा कारोबार धीरज साहू के रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर है। मूल रूप से झारखंड के लोहरदगा जिले की 'बलदेव साहू एंड ग्रुप ऑफ कंपनीज' ने ओडिशा में 40 साल पहले देसी शराब बनाने का कारोबार शुरू किया था। बौद्ध डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड (बीडीपीएल) इस कंपनी की साझेदारी फर्म है। क्वालिटी बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड, किशोर प्रसाद विजय प्रसाद बेवरेज प्राइवेट लिमिटेड और बलदेव साहू इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड इसी कंपनी से जुड़ी हुई है।

साल 2018 के चुनाव में धीरज के पास थी 34 करोड़ संपत्ति

धीरज प्रसाद साहू ने वर्ष 2018 में राज्यसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग को जो शपथ पत्र दिया था, उसमें उन्होंने अपनी 34 करोड़ रुपये संपत्ति की घोषणा की थी। उन्होंने 2.36 करोड़ रुपये का कर्ज भी खुद पर घोषित किया था। उन्होंने अपनी आमदनी वित्त वर्ष 2016-17 के इनकम टैक्स रिटर्न में 1 करोड़ रुपये से अधिक बताई थी।

तीन बार राज्यसभा सांसद, दो बार लड़ा लोकसभा चुनाव

धीरज साहू साल 2018 में तीसरी बार राज्यसभा सांसद बने। इसके अलावा कांग्रेस के टिकट पर वो दो बार झारखंड के चलता लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं, हालांकि इन दोनों चुनावों में उन्हें हार झेलनी पड़ी थी। 23 नवंबर, 1959 को धीरज प्रसाद साहू का जन्म उद्योगपति राय साहब बलदेव साहू के लोहरदगा स्थित पैतृक आवास पर हुआ था। धीरज के भाई स्व. शिव प्रसाद साहू रांची से लोकसभा सांसद रहे हैं। धीरज साहू पहली बार वर्ष 2009 के जून महीने में राज्यसभा उपचुनाव में जीतकर संसद पहुंचे थे। दूसरे बार वो जुलाई 2010 में राज्यसभा सदस्य चुने गए और तीसरी बार 2018 में राज्यसभा पहुंचे।

छापे पर कंपनी ने अभी तक नहीं दी कोई प्रतिक्रिया

तीन दिन से जारी छापेमारी में नकदी से भरे 156 बैग बरामद'विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को बोलांगीर जिले के सुदापाड़ा में छापेमारी के दौरान नकदी से भरे 156 बैग बरामद किए। एक अधिकारी ने कहा, '156 बैग में से केवल छह-सात की गिनती की गई, जिसमें 20 करोड़ रुपये की रकम पाई गई।' विभाग ने संबलपुर, बोलांगीर, टिटिलागढ़, बौध, सुंदरगढ़, राउरकेला और भुवनेश्वर में छापेमारी की। कंपनी ने अभी तक छापे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

IT द्वारा हो सकती है अब तक की सबसे बड़ी नकदी जब्ती

देश की सबसे बड़ी शराब बनाने वाली और बिक्री करने वाली कंपनियों में शुमार ‘बलदेव साहू एंड ग्रुप ऑफ कंपनीज’ के बोलांगीर कार्यालय पर छापेमारी के दौरान बृहस्पतिवार को लगभग 200 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए। बुधवार को सुंदरगढ़ शहर के सरगीपाली में कुछ घरों, कार्यालयों और शराब उत्पादन इकाई पर छापेमारी की गई थी। आयकर विभाग के पूर्व आयुक्त शरत चंद्र दास ने कहा कि यह ओडिशा में आयकर विभाग द्वारा अब तक की सबसे बड़ी नकदी जब्ती हो सकती है। दास ने कहा, 'मैंने राज्य में इतनी बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होते कभी नहीं देखी।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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