उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम पर 57,613 करोड़ रूपये खर्च किए जाएंगे और 10 हजार इलेक्ट्रिक बसों की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह राशि 10 वर्ष में खर्च की जाएगी, जिसके लिए केंद्र सरकार 20 हजार करोड़ रूपए देगी और शेष राशि राज्यों को देनी होगी। देश में 3 लाख से 40 लाख की आबादी वाले 169 शहर हैं। कार्यक्रम के लिए इनमें से ‘चैलेंज मोड’ के आधार पर 100 शहरों का चयन किया जाएगा।
ई-बसें सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत इन चुने गए शहरों में परिचालित की जाएंगी। वैसे, सरकार का फोकस इस योजना के जरिए नगरीय बस परिवहन सेवा का विस्तार करने, उसे सुविधाजनक बनाने के साथ हरित आवाजाही को बढ़ाने पर है।
ठाकुर ने बताया- ये नई 10 हजार इलेक्ट्रिक बसें देशभर में चलाई जाएंगी और ये बसें 100 शहरों में दौड़ेंगी। योजना को मंजूरी पर्यावरण और आने वाले भविष्य को ध्यान में रखकर दी गई है।
