West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार अपने दोनों चुनाव आयुक्तों के साथ रविवार रात कोलकाता पहुंचने वाले हैं। निर्वाचन आयोग की यह उच्च स्तरीय टीम 9 और 10 मार्च को राज्य में चुनाव संबंधी तैयारियों की समीक्षा करेगी।
बताया जा रहा है कि, इस दौरान आयोग ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ श्रेणी में चिन्हित मतदाताओं के दस्तावेजों के न्यायिक परीक्षण की प्रक्रिया की भी जांच करेगा और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अहम बैठकें करेगा। गौरतलब है कि, आयोग ने अपनी चुनावी तैयारियों की रणनीति के तहत सबसे पहले केरल का दौरा किया था और अब वह सीधे पश्चिम बंगाल पहुंचकर वहां की स्थिति और व्यवस्थाओं का जायजा लेने जा रहा है।
अन्य चुनावी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश का दौरा
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी की विधानसभाओं का कार्यकाल मई और जून के बीच अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होने वाला है। ऐसे में इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में अप्रैल के दौरान विधानसभा चुनाव कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियों की समीक्षा के बाद निर्वाचन आयोग अन्य चुनावी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश का भी दौरा करेगा। इन चारों राज्यों और पुडुचेरी में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण पहले ही पूरा किया जा चुका है और अंतिम मतदाता सूची भी प्रकाशित की जा चुकी है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग जल्द ही इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित कर सकता है।
किस पर केंद्रित रहेगा पश्चिम बंगाल का दौरा?
आयोग द्वारा 9 और 10 मार्च को किया जाने वाला दौरा मुख्य रूप से मतदाता सूची की शुद्धता और सटीकता की जांच पर केंद्रित होगा। ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ श्रेणी में शामिल मतदाताओं की समीक्षा इस बात को सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है कि किसी प्रकार की फर्जी वोटिंग न हो सके। इसके अलावा, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक का मकसद सुरक्षा व्यवस्था तय करना और निष्पक्ष चुनाव कराने की रूपरेखा तैयार करना है।
चुनावी कार्यक्रमों की घोषणा होने की संभावना
जैसे ही मुख्य चुनाव आयुक्त और उनकी टीम वापस दिल्ली लौटेगी, वैसे पांच राज्यों जिनमें पश्चिम बंगाल और केरल शामिल हैं, में विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा होने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। इन दोनों राज्यों में सत्ताधारी दलों के सामने अपनी राजनीतिक पहचान बनाए रखने की चुनौती है, जबकि विपक्षी दल इस सक्रियता को लेकर बड़ी उम्मीदें लगाए हुए हैं।
