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'युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती कराने की कोशिश कर रहा था छात्र', STF ने किया गिरफ्तार

बांग्लादेश के आतंकी संगठन से ताल्लुक रखने वाले कंप्यूटर साइंस के छात्र को पश्चिम बंगाल STF ने गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि छात्र पर ये आरोप है कि उसका बांग्लादेश के प्रतिबंधित इस्लामी संगठन शहादत-ए-अल-हिकमा से वो संबंध है। आपको इस कार्रवाई से जुड़ी बड़ी बातें बताते हैं।

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फाइल फोटो।

West Bengal News: पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष कार्यबल (एसटीएफ) ने बांग्लादेश के आतंकवादी संगठन से जुड़े होने के आरोप में एक कॉलेज छात्र समेत कुछ अन्य लोगों को पश्चिम बर्धमान जिले के पानागढ़ क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।

आतंकी संगठन से ताल्लुक रखने वाला छात्र गिरफ्तार

उन्होंने बताया कि आरोपी युवक कंप्यूटर विज्ञान विषय में द्वितीय वर्ष का छात्र है। अधिकारी ने बताया कि आरोपी छात्र को बांग्लादेश के प्रतिबंधित इस्लामी संगठन शहादत-ए-अल-हिकमा से संबंध रखने के आरोप में शनिवार देर शाम पानागढ़ स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया। अधिकारी ने बताया कि पूछताछ में उससे मिली जानकारी के आधार पर एसटीएफ के अधिकारियों ने उसी जिले के नबाबघाट क्षेत्र से अन्य पांच लोगों को भी पकड़ लिया।

'युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती कराने का कोशिश'

एसटीएफ अधिकारी ने बताया, 'गिरफ्तार आरोपी पश्चिम और पूर्वी बर्धमान जिले के युवाओं को आतंकवादी संगठन में भर्ती कराने का प्रयास कर रहा था। हम उसके संपर्क में आए लोगों के बारे में पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि पकड़े गए पांच अन्य लोगों में गिरफ्तार व्यक्ति का भाई भी शामिल है, जो आतंकवादी संगठन में शामिल होने की कोशिश कर रहे थे।

छात्र के पास से बरामद दस्तावेज किए गए जब्त

अधिकारी ने बताया कि एसटीएफ ने छात्र का लैपटॉप, डायरी समेत कुछ अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। शहादत-ए-अल-हिकमा बंग्लादेश में एक प्रतिबंधित इस्लामी आतंकवादी संगठन है। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने 2016 में जिले के कांकसा इलाके से एक अन्य छात्र को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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