देश

Gyanvapi Survey: वजूखाने से दूर ही रहेगी ASI की टीम! जानें ज्ञानवापी सर्वे से जुड़ी 5 अहम बातें

Gyanvapi Masjid Survey: अर्कोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की टीम ने वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वे शुरू कर दिया है। एएसआई की टीम सुबह सात बजे ज्ञानवापी परिसर में पहुंची। ASI की टीम में कुल 32 सदस्य हैं साथ ही टीम के साथ 4 वकील भी मौजूद हैं। सर्वे के दौरान ज्ञानवापी परिसर में सभी पक्षों के एक-एक वकील मौजूद हैं।

Image

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वे कर रही ASI की टीम।

Photo : PTI

Gyanvapi Survey News: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वे अर्कोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की टीम ने सुबह सात बजे शुरू कर दिया है। वाराणसी की जिला अदालत में 4 अगस्त तक ASI को अपनी सर्वे रिपोर्ट सौंपनी है। बीते शुक्रवार को जिला अदालत ने मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराने का आदेश दिया था। जिला जज एके विश्वेश के इस आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। आपको ज्ञानवापी सर्वे से जुड़ी 5 अहम बातें बताते हैं।

1). सर्वे में एएसआई की टीम क्या करेगी?

सोमवार की सुबह 7 बजे ज्ञानवापी परिसर का 32 सदस्यों वाली ASI की टीम ने सर्वे शुरू कर दिया है। एएसआई की टीम के साथ सभी पक्ष के एक-एक वकील मौजूद हैं। दरअसल, पांच महिलाओं ने अगस्त 2021 में वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिविजन) के सामने एक वाद दायर किया था। जिसमें ये मांग की गई थी कि मस्जिद के बगल में बने श्रृंगार गौरी मंदिर में रोजाना पूजा और दर्शन की अनुमति दी जाए। विवाद ने तूल पकड़ा और मामला हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। शुक्रवार को परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराने का आदेश जिला जज ने दिया।

2). वजूखाने को छोड़ कर पूरे परिसर का होगा सर्वेक्षण

इससे पहले इन 5 महिलाओं की याचिका पर मस्जिद परिसर का एडवोकेट सर्वे कराने का आदेश जज रवि कुमार दिवाकर ने दिया था. पिछली साल कोर्ट के आदेश के बाद तीन दिन तक ज्ञानवापी परिसर का सर्वे हुआ। सर्वे के बाद हिंदू पक्ष ने ये दावा किया था कि वजूखाने में शिवलिंग है। जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसे फव्वारा करार दिया था। विवाद बढ़ने के बाद हिंदू पक्ष ने इस स्थान को सील करने की मांग की थी। मामला सुप्रीम कोर्ट में है और इस पूरे एरिया को सील किया गया है।

3). सर्वे में किस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा?

ASI की टीम जिला अदालत के आदेश पर ज्ञानवापी परिसर का सर्वे कर रही है। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने ये जानकारी साझा की है कि सर्वे में ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार और मॉडर्न तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

4). मस्जिद परिसर में जमीन के नीचे हो सकती है मूर्ति

सर्वे को लेकर सभी पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं। हिंदू पक्ष की ओर से ये कहा गया है कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में बीच के गुंबद के नीचे की जमीन धपधप करती है। ऐसी आवाज आती है, जिससे लगता है कि जमीन के नीचे मूर्ति हो सकती है। हो सकता है कि इसे कृत्रिम दीवार बनाकर ढंक दिया गया हो।

5). ज्ञानवापी के पूरे सर्वे में कितना समय लगने के आसार

वाराणसी जिला जज ने 4 अगस्त तक सर्वे रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। हालांकि वकील विष्णु ने कहा है कि 2002 में ASI को अयोध्या के राम मंदिर मामले में सर्वे की अनुमति मिली थी। उस वक्त ASI ने तीन साल बाद 2005 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। उनका मानना है कि ज्ञानवापी परिसर के एएसआई सर्वे में तीन से छह महीने का वक्त लगने की उम्मीद है।

क्या है काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी विवाद?

स्कंद पुराण में कहा गया है कि काशी विश्वनाथ को 12 ज्योतिर्लिंगों में से सबसे अहम माना जाता है। काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद काफी पुराना है। काशी विश्वनाथ मंदिर के पुरोहितों के वंशज ने वर्ष 1991 में जो याचिका दायर की थी, उसमें ये दावा किया गया था कि राजा विक्रमादित्य ने 2050 साल पहले जो काशी विश्वनाथ का मूल मंदिर बनवाया था, उसे औरंगजेब ने 1669 में तोड़ दिया था और इसी जगह ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण करवा दिया था। मस्जिद के निर्माण में मंदिर के अवशेषों का ही इस्तेमाल हुआ।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article