उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की शुरुआत इसी महीने के अंत में शुरू होने जा रही है। श्रद्धालुओं को इसका बेसब्री से इंतजार है और सरकार भी इस आयोजन को सफल बनाने के लिए कोई भी कोर कसर छोड़ना नहीं चाहती। हालांकि उत्तराखंड के धामों की सड़क मार्ग की स्थिति बेहद खतरनाक हो गई है। इन्हें देखकर ये कहना गलत नहीं होगा कि कभी भी दुर्घटना घट सकती है।
उत्तराखंड चार धाम यात्रा के लिए अब तक 10 लाख यात्रियों ने रजिस्ट्रेशन करवा लिया है। ऐसे में सड़क मार्ग ऑल वेदर रोड्स के तहत पहाड़ को काट कर चौड़ीकरण किया जा रहा है। लेकिन केदारनाथ मंदिर से ठीक 40 किमी पहले सड़क का हाल बदहाल हो चुका है। लगातार पहाड़ दरक रहा है और सड़कें ऊबड़ खाबड़ हो चुकी हैं। छोटी सी भूल आपको बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है।
स्थानीय लोग इससे काफी परेशान हैं। कुछ को लगता है कि अगर इस वक्त कुछ भी बोला तो टूरिस्ट नहीं आएंगे। लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि सरकार की ढीली कार्रवाई की वजह से इसका निर्माण नहीं हो पाया है। अगर सरकारी अफसर गंभीर होते तो नजारा कुछ और ही होता।
टेंडरों में भारी भ्रष्टाचार का आरोप
रूद्रप्रयाग केदारनाथ के पूर्व विधायक मनोज रावत ने केदारनाथ यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर हुए टेंडरों में भारी भ्रष्टाचार और सरकार के मंत्रियों की शह पर जिले से बाहर के लोगों काम दिए जाने का आरोप लगाया है। पूर्व विधायक मनोज रावत ने कहा केदार बद्री के लोग केवल गंदगी ढोने के लिए रह गए हैं।
उन्होंने कहा हमारे बच्चों का रोजगार छीना जा रहा है। उन्होंने सरकार की यात्रा तैयारियों पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा किया है। उन्होंने कहा सरकार बड़ी संख्या में तीर्थ यात्रियों के आने का दावा कर रही है लेकिन कुण्ड से गुप्तकाशी 10 किमी पहुंचने में एक दिन का समय लग रहा है। शौचालयों का निर्माण, रहने की व्यवस्थाएं नहीं की जा सकी हैं जबकि केदारनाथ के कपाट खुलने में मात्र 15 दिन का समय शेष रह गया है। पूर्व विधायक मनोज रावत ने कहा सरकार की कथनी और करनी में बहुत बड़ा फर्क है।
(अभिषेक सिन्हा की रिपोर्ट)
