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सारस के सहारे SP का सरकार पर निशानाः PM का नाम लिए बगैर बोले अखिलेश- जो खिला रहे थे दाना, उनसे मोर भी छीन लेना चाहिए

  • Produced by: अभिषेक गुप्ता
  • Updated Mar 22, 2023, 04:17 PM IST

दरअसल, दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मोर प्रेम सामने आया था। घटना से जुड़ा वीडियो भी आया था, जिसमें वह मोर को दाना खिला रहे थे। पीएम के इस प्रेम को लेकर सियासी गलियारों में खासा चर्चाएं हुई थीं।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइलः IANS/iStock)

Photo : टाइम्स नाउ ब्यूरो

समाजवादी पार्टी (सपा) की ओर से सारस के सहारे सरकार पर सियासी निशाना साधा गया है। पार्टी चीफ और उत्तर प्रदेश (यूपी) के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ इशारा करते हुए कहा है कि अगर सरकार सारस छीन रही है तो उन लोगों से मोर भी छीन लेना चाहिए, जो उसे दाना खिला रहे थे। सपा मुखिया की यह टिप्पणी उस मामले पर आई, जिसमें यूपी के अमेठी के जामो क्षेत्र में आरिफ नाम के शख्स के साथ करीब एक साल से रह रहे सारस को वन विभाग की ओर से मंगलवार को रायबरेली के समस्तपुर पक्षी विहार भेज दिया गया था।

बुधवार (22 मार्च, 2023) को सूबे की राजधानी लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस में यादव ने आरोप लगाया और कहा- सरकार ने सारस सिर्फ इसलिए 'छीना' क्योंकि वह (अखिलेश) पांच मार्च को आरिफ और उस सारस से मिलने और बधाई देने चले गए थे। क्या यही लोकतंत्र है? लोगों ने कुत्ते-बिल्ली पाल रखे हैं। न जाने कितने पालतू कुत्तों ने कितने लोगों को काटा है। सरकार ने उस पर क्या किया?

पीएम मोदी का नाम लिए बगैर अखिलेश आगे बोले, ''सरकार अगर सारस छीन रही है तो सरकार को उनसे भी मोर भी छीन लेना चाहिए जो उसे दाना खिला रहे थे। क्या सरकार की हिम्मत है वहां पहुंच जाने की? ऐसा सरकार ने सिर्फ इसलिए किया क्योंकि सारस और उसे पालने वाले आरिफ से मैं मिलकर आ गया। सरकार ने उस सारस को कैद कर लिया है। सरकार बताए कि आखिर उसने सारस को कहां कैद किया है।''

पूर्व सीएम के मुताबिक, ''मुझे याद है, हमारी सरकार ने इटावा में सारस संरक्षण के लिए एक अनुसंधान केंद्र की योजना बनाई थी...उसे भी बंद कर दिया गया। इटावा में सारस का संरक्षण केंद्र बन रहा था उसे इस सरकार ने छीन लिया। सारस मित्र बनाए जा रहे थे लेकिन सरकार ने उनका मानदेय खत्म कर दिया। बर्ड फेस्टिवल होते थे, उन्हें भी खत्म कर दिया। भाजपा वालों से आप उम्मीद नहीं कर सकते कि वे पर्यावरण के लिए भी कुछ कर सकते हैं।''

अभिषेक गुप्ता
अभिषेक गुप्ताauthor

छोटे शहर से, पर सपने बड़े-बड़े. किस्सागो ऐसे जो कहने-बताने और सुनाने को बेताब. कंटेंट क्रिएशन के साथ नजर से खबर पकड़ने में पारंगत और "मीडिया की मंडी" में लगभग आठ साल का अनुभव. न्यूज, सिनेमा, बाइक्स और घूमने में दिलचस्पी.

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