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अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध लगा रहा था रूसी सॉफ्टवेयर, बाइडन ने लगाया बैन

America Ban Russian Kaspersky software: अमेरिका ने कहा है कि रूसी कंपनी कैस्परस्की के संचालन को प्रभावित करने या निर्देशित करने की क्षमता के कारण अमेरिका में कंपनी के संचालन से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है। हम अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और अपने लोगों की सुरक्षा के लिए हर उपकरण का उपयोग करना जारी रखेंगे।

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अमेरिका ने रूसी कंपनी के सॉफ्टवेयर को किया बैन

Photo : Twitter

America Ban Russian Kaspersky software: अमेरिका ने मॉस्को स्थित साइबर सुरक्षा कंपनी कैस्परस्की द्वारा बनाए गए एंटीवायरस सॉफ्टवेयर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने एक बयान में कहा कि रूसी सरकार की आक्रामक साइबर क्षमताओं और कैस्परस्की के संचालन को प्रभावित करने या निर्देशित करने की क्षमता के कारण अमेरिका में कंपनी के संचालन से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है।

अमेरिका की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कैस्परस्की अब आम तौर पर अन्य गतिविधियों के अलावा अमेरिका में अपने सॉफ़्टवेयर नहीं बेच सकेगी और न ही पहले से उपयोग किये जा रहे सॉफ़्टवेयर के अपडेट प्रदान करने में सक्षम होगी। विभाग ने कहा कि कैस्परस्की के व्यापक रूप से इंस्टॉल किए गए एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर के निजी और पेशेवर यूजरों को जोखिम के कारण कोई अन्य विकल्प तलाशना चाहिए।

वाणिज्य सचिव जीना रायमोंडो ने कहा, रूस ने बार-बार दिखाया है कि उनके पास कैस्परस्की लैब जैसी रूसी कंपनियों का शोषण करने की क्षमता और इरादा है, ताकि वे संवेदनशील अमेरिकी जानकारी एकत्र कर सकें और उसे हथियार बना सकें। हम अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और अमेरिकी लोगों की सुरक्षा के लिए अपने पास मौजूद हर उपकरण का उपयोग करना जारी रखेंगे।

कैस्परस्की ने आरोपों को नकारा

अमेरिका में कैस्परस्की सॉफ्टवेयर की बिक्री पर 20 जुलाई से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। रूसी बहुराष्ट्रीय कंपनी 29 सितंबर तक मौजूदा यूजरों को सॉफ्टवेयर अपडेट प्रदान करने में सक्षम होगी। कैस्परस्की का सॉफ्टवेयर यूजरों को ट्रोजन, स्पाइवेयर और अन्य साइबर खतरों से बचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। अमेरिका में, सरकारी उपकरणों पर इसके इंस्टॉलेशन पर 2017 से प्रतिबंध लगा दिया गया है। जर्मनी में भी सूचना सुरक्षा के जुड़े संघीय कार्यालय ने सॉफ्टवेयर का उपयोग करने के खिलाफ चेतावनी दी है। कैस्परस्की ने अपने उत्पादों से किसी प्रकार का जोखिम होने की बात से इनकार करते हुए कहा है कि यह एक निजी वैश्विक साइबर सुरक्षा कंपनी है जिसका रूसी सरकार से कोई संबंध नहीं है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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