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विवादों में फंसी IAS पूजा खेडकर को बड़ा झटका, UPSC ने रद्द की उम्मीदवारी

IAS Puja Khedkar: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने प्रशिक्षु IAS पूजा खेडकर की अस्थाई उम्मीदवार रद्द कर दी है। इसके साथ ही खेडकर पर भविष्य में किसी भी परीक्षा में शामिल होने पर भी रोक लगाई गई है।

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UPSC ने IAS पूजा खेडकर पर की बड़ी कार्रवाई।

Photo : Twitter

IAS Puja Khedkar: विवादों में फंसी प्रशिक्षु आईएएसअ अधिकारी पूजा खेडकर को बड़ा झटका लगा है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने उनकी अस्थाई उम्मीदवार को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही खेडकर पर भविष्य में किसी भी परीक्षा में शामिल होने पर भी रोक लगाई गई है। संघ लोक सेवा आयोग की ओर से बताया गया कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यूपीएससी ने पूजा खेडकर को सीएसई-2022 नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया, जिसके बाद उनकी उम्मीदवारी को रद्द कर दिया गया है।

बता दें, यूपीएससी की ओर से इसके संकेत पहले ही दिए गए थे। यूपीएससी ने पूजा खेडकर को इस संबंध में कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। फर्जी दस्तावेज सामने आने के बाद आयोग की ओर से पूजा खेडकर के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी और उनसे पूछा गया था कि क्यों न उनकी उम्मीदवारी को रद्द कर दिया जाए।

यूपीएससी ने खंगाले 15 साल के रिकॉर्ड

पूजा खेडकर का मामला सामने आने के बाद संघ लोग सेवा आयोग ने 2009 से 2023 तक 15 हजार से अधिक उम्मीदवारों के सीएसई डेटा की जांच की। इस दौरान पूजा खेडकर के अलावा ऐसा कोई उम्मीदवार नहीं मिला, जिसने दस्तावेजों के साथ फर्जीवाड़ा किया था। यह इकलौता केस था, जिसमें यूपीएससी इस बात का पता नहीं लगा पाया कि पूजा खेडकर ने कितनी बार यूपीएससी की परीक्षा दी, क्योंकि उन्होंने हर बार न केवल अपना नाम बल्कि अपने माता-पिता के नाम को भी बदल दिया।

पूजा खेडकर ने किया था ये फर्जीवाड़ा

संघ लोक सेवा आयोग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था कि पूजा खेडकर ने अपना नाम, अपने माता-पिता का नाम, अपनी तस्वीर/हस्ताक्षर, अपनी ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और पता बदलकर पहचान छिपाई और परीक्षा नियमों के तहत अनुमेय सीमा से अधिक प्रयासों का लाभ उठाया। इसके अलावा उन पर फर्जी दिव्यांगता और ओबीसी सर्टिफिकेट प्रयोग करने का भी आरोप था। बीते दिनों पुणे में पोस्टिंग के दौरान वह अपनी मर्सडीज कार में लाल-नीली बत्ती लगाने पर भी विवादों में घिरी थीं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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