देश में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से रबी सीजन की फसलों, खासकर गेहूं को हुए नुकसान को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को अधिकारियों को अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों के साथ समन्वय बनाकर प्रभावित फसलों का सही और विस्तृत आकलन किया जाए। कृषि स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने बताया कि खराब मौसम ऐसे समय में आया जब कई राज्यों में फसलें पूरी तरह पक चुकी थीं और कटाई के लिए तैयार थीं। इससे किसानों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि सिर्फ बारिश ही नहीं हुई, बल्कि कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी देखने को मिली, जिसके कारण खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित हुई हैं।
अधिकारियों को मिले ये निर्देश
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे तुरंत राज्य सरकारों से संपर्क कर उन इलाकों की पहचान करें, जहां ओलावृष्टि और भारी बारिश की वजह से फसलों को नुकसान पहुंचा है। ऐसी परिस्थितियों में अक्सर फसलें गिर जाती हैं, जिससे किसानों की मेहनत पर असर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि आमतौर पर राज्य सरकारें अपने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के जरिए प्रभावित किसानों को राहत देती हैं। इसके साथ ही उन्होंने फसल बीमा योजना से जुड़े अधिकारियों को विशेष रूप से राज्यों के साथ बेहतर समन्वय बनाने के निर्देश दिए हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि फसल की कटाई सही तरीके से हो सके और हुए नुकसान का वास्तविक और सटीक आकलन किया जा सके।
दो और पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना
कृषि मंत्री ने कहा कि जिन किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है, उसका मूल्यांकन पूरी तरह सटीक और वैज्ञानिक तरीके से किया जाना जरूरी है, ताकि बीमा दावों का निपटारा बिना किसी बाधा के प्रभावी रूप से किया जा सके। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दो और पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना जताई है। इसे देखते हुए अधिकारियों को सतर्क रहने और किसानों के लिए समय-समय पर जरूरी सलाह जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। खरीद व्यवस्था को लेकर मंत्री ने बताया कि गेहूं और धान की सरकारी खरीद प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी।
रबी फसलों का उत्पादन सामान्य से रहा काफी बेहतर
सरकारी बयान के मुताबिक केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस सीजन में रबी फसलों का उत्पादन सामान्य से काफी बेहतर रहा है। उन्होंने तुअर, मसूर और उड़द जैसी दलहन फसलों का जिक्र करते हुए बताया कि NAFED और NCCF जैसी एजेंसियां किसानों द्वारा लाई गई पूरी उपज की खरीद सुनिश्चित करेंगी। साथ ही यह प्रयास भी किया जाएगा कि बाजार में इन फसलों की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे न जाएं। मंत्री ने कृषि क्षेत्र में सिर्फ उत्पादन बढ़ाने के बजाय फसलों की गुणवत्ता सुधारने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने मध्य प्रदेश की प्रीमियम किस्म ‘शरबती’ गेहूं का उदाहरण देते हुए बताया कि इस किस्म को बाजार में सामान्य गेहूं की तुलना में 400 रुपये से अधिक का अतिरिक्त मूल्य मिलता है। उन्होंने ऐसी किस्मों को उच्च-मूल्य वाले अनाज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक आदर्श मॉडल बताया।
(इनपुट - भाषा)
