केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 लाने को हरी झंडी दी गई।
सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में जजों की संख्या 33 है। इसमें मुख्य न्यायाधीश नहीं शामिल हैं। वहीं, अब केंद्र की मोदी सरकार ने यह संख्या बढ़ाकर 37 करने की अनुसंशा की है। इस तरह से देखें तो सुप्रीम कोर्ट में कुल 4 नए जजों की बढ़ोतरी होगी।
जजों की संख्या बढ़ाने के के पीछे मकसद
सरकार के अनुसार, जजों की संख्या बढ़ाने से लंबित मामलों का बोझ कम होगा, सुनवाई की रफ्तार बढ़ेगी और शीर्ष अदालत की कार्यक्षमता और प्रभावशीलता में सुधार होगा।क्या होगा खर्च का प्रावधान?
नए जजों और उनके स्टाफ पर होने वाला खर्च भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से उठाया जाएगा। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत संसद को सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या तय करने का अधिकार है। इसी आधार पर समय-समय पर कानून में संशोधन कर संख्या बढ़ाई जाती रही है।
कब कब बढ़ी सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या
भारत में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के न्यायाधीशों की संख्या समय-समय पर बढ़ाई गई है,जिसका आधार अनुच्छेद 124 (1) में निहित प्रावधान है,जो संसद को जजों की संख्या तय करने का अधिकार देता है। जब 1950 में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई थी,तब इसमें एक मुख्य न्यायाधीश और सात अन्य न्यायाधीश यानी कुल 8 जज थे।
इसके बाद 1956 में 'सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम' के तहत अन्य जजों की संख्या 7 से बढ़ाकर 10 कर दी गई। फिर 1960 में इसे बढ़ाकर 13, 1977 में 17 कर दिया गया। 1986 में एक बड़ा बदलाव करते हुए संख्या 17 से बढ़ाकर 25 की गई। इसके बाद 2008 में इसे 30 तक बढ़ाया गया और अंततः 2019 के संशोधन के जरिए जजों की संख्या 33 (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दी गई। इस तरह वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में कुल 34 न्यायाधीश (एक मुख्य न्यायाधीश सहित) है।
- 1956: सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम अधिकतम 10 जज
- 1960 संशोधन: संख्या 13
- 1977 संशोधन: संख्या 17
- 1986 संशोधन: संख्या 25
- 2008 संशोधन: संख्या 30
- 2019 संशोधन: संख्या 33
- 2026 प्रस्ताव: संख्या बढ़ाकर 37
