Giriraj Singh on Palamu violence : झारखंड के पलामू के पांकी में 15 फरवरी को शिवरात्रि के तोरण द्वार बनाने को लेकर दो पक्षों के बीच हुई हिंसा के बाद अब शांति है लेकिन पूरे इलाके में तनाव बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। पलामू में तनाव के बाद धारा 144 लागू है। संवेदनशील जगहों पर सुरक्षाबल तैनात हैं।आपको बता दें कि स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए हजार से अधिक पुलिस जवान क्षेत्र में तैनात किए गए है। वहीं क्षेत्र के जितने भी धार्मिक स्थल है उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इस बीच पलामू हिंसा पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) ने बड़ा बयान दिया है।
आज तक देश में किसी भी ताजिया पर पत्थर नहीं फेंका गया
गिरिराज सिंह ने कहा कि तोरण द्वार भारत में नहीं तो क्या पाकिस्तान और बांग्लादेश में बनेगा। गिरिराज सिंह ने कहा कि सिर्फ हिंदुओं के त्योहार पर ही ऐसी साजिश होती है। गिरिराज सिंह ने कहा कि देश में मुस्लिमों की आबादी चिंता का विषय नहीं है बल्कि जिन्ना के रास्ते पर चलने वाले कट्टरपंथी खतरा हैं। गिरिराज सिंह ने कहा कि हिंदुओं के द्वारा आज तक देश में किसी भी ताजिया पर पत्थर नहीं फेंका गया है। लेकिन रामनवमी में होता है, तोरण द्वार में हुआ। तोरण द्वार भारत में नहीं तो क्या पाकिस्तान और बांग्लादेश में बनेगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज की आबादी चिंता का विषय नहीं बल्कि जिन्ना के रास्ते पर चलने वाले कट्टरपंथी ऐसा काम कर रहे हैं।
जहां सिर्फ मुस्लिम आबादी है वहां तोरणद्वार बनाने की क्या जरूरत
पलामू हिंसा को लेकर गिरिराज सिंह कट्टरपंथी मुस्लिमों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं तो झारखंड से कांग्रेस MLA इरफान अंसारी ने पलामू के पांकी में हिंसा के पीछे RSS-BJP की साजिश बताया था। इरफान अंसारी ने कहा कि जहां सिर्फ मुस्लिम आबादी है वहां तोरणद्वार बनाने की क्या जरूरत है और अगर तोरणद्वार बनाना था तो मुस्लिमों से सहमति बनानी चाहिए थे। इरफान अंसारी ने कहा कि शोभायात्रा के रूट में बदलाव मंजूर नहीं है। पहले से तय रूट बदलने से हिंसा होती है।
देवघर में जिला प्रशासन द्वारा 144 लगाने के मामले पर कहा कि रूट से छेड़खानी करना गलत है, रूट नहीं बदलना चाहिए। जहां-जहां बदलने की कोशिश की गई वहां-वहां दंगा हुआ है। झारखंड में रूट को बदलने को लेकर झारखंड में पहले भी हंगामा हो चुका है। और इरफान अंसारी ने कहा कि जहां मुस्लिमों की संख्या ज्यादा है वहां सहमति बना कर ही शिवरात्रि का जुलूस निकालना चाहिए था या गेट बनाना चाहिए था।
