LNG-PNG Crisis: ईरान युद्ध की वजह से ईंधन पर गहराए संकट को दूर करने के लिए भारत सरकार लगातार कदम उठा रहा ही। रिपोर्टों के मुताबिक देश भर में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 लागू करने के बाद वह कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अल्जीरिया जैसे देशों से अतिरिक्त LNG-PNG मंगा रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार अभी मौजूद है। हालांकि, देश के कई हिस्सों में घरेलू एवं व्यावसायिक उपयोग वाले सिलेंडरों की किल्लत सामने आई है। लोगों की शिकायत है कि उन्हें गैस के सिलेंडर मिलने में देरी हो रही है। सरकार ने कहा है कि घरेलू सिलेंडर बुक करने के बाद ढाई दिन के बाद उसकी आपूर्ति हो सकती है।
ईंधन संकट पर भारत सरकार की करीबी नजर
ईंधन संकट पर भारत सरकार की करीबी नजर बनी हुई है। अधिनियम लागू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक कर स्थिति और ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर की समीक्षा की। इससे पहले कैबिनेट बैठक में भी मोदी ने सभी मंत्रियों से अपने-अपने मंत्रालयों में हालात का आकलन करने और सभी हितधारकों से बातचीत कर यह सुनिश्चित करने को कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्ष का असर आम लोगों पर न पड़े।
स्थिति से निपटने के लिए बनाई गई समिति
व्यावसायिक LPG की सप्लाई में रुकावट के कारण कई बड़े शहरों में होटल उद्योग पर असर पड़ने लगा है और कुछ जगहों पर बंद होने की नौबत आ गई है। सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए एक समिति भी बनाई है। सरकार के आदेश के अनुसार उर्वरक (फर्टिलाइजर) इकाइयों को पिछले छह महीनों की औसत खपत का 70% गैस दी जाएगी। औद्योगिक इकाइयों को उनकी औसत खपत का 80% गैस मिलेगा। रिफाइनरियों को गैस आपूर्ति 65% तक सीमित की जाएगी। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की जरूरतें पूरी करने के लिए पेट्रोकेमिकल संयंत्रों और बिजलीघरों को मिलने वाली गैस में कटौती की जा सकती है।
LNG आयात पर संकट
भारत रोजाना लगभग 190 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस की जरूरत रखता है, जिसमें से लगभग आधा आयात किया जाता है। आयातित LNG का 50% से अधिक कतर और यूएई से आता है, जो आमतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत पहुंचता है। लेकिन पिछले लगभग 10 दिनों से इस जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप है। अधिकारियों के अनुसार सरकार दूसरे समुद्री मार्गों से LNG आयात करने के लिए कई देशों से बातचीत कर रही है। वहीं रिफाइनरियों ने तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए स्पॉट मार्केट से खरीद भी की है। सरकार ने PNG, CNG और LPG उत्पादन को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल किया है, क्योंकि इनका असर भारत में करोड़ों लोगों पर पड़ता है। हालांकि प्राकृतिक गैस का उपयोग उर्वरक, पेट्रोकेमिकल, चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और बिजली उत्पादन में भी होता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में समान वितरण और निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सेक्टरवार आवंटन को नियंत्रित करना जरूरी माना गया है।
भारत की जहां तक बात है तो भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 88 प्रतिशत आयात करता है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। देश की कुल खपत लगभग 58 लाख बैरल प्रतिदिन है जिसमें से करीब 25 से 27 लाख बैरल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है।
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